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Aaditya Thackeray: 'डरपोक और एहसान-फरामोश लोग ही छोड़ रहे दल’, टीएमसी के बागी विधायकों पर आदित्य ठाकरे का हमला

Sat, 13 Jun 2026 11:29 AM IST
Asmita Tripathi पीटीआई, मुंबई

सार

शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने टीएमसी के बागी सांसदों-विधायकों पर निशाना साधा। उन्होंने विधायकों को डरपोक और कृतघ्न बताया। उन्होंने कहा कि वह ममता बनर्जी और पार्टी के योगदान को भूल गए हैं। 

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शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे - फोटो : एक्स@AUThackeray
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विस्तार
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शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने टीएमसी के बागी विधायकों पर हमला बोला। उन्होंने पार्टी के खिलाफ बगावत करने वालों को डरपोक करार दिया। उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति कृतघ्न रहे लोग अब पार्टी छोड़ रहे हैं।

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टीएमसी में बगावत
ठाकरे, जिनकी अपनी पार्टी महाराष्ट्र में 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विद्रोह के बाद विभाजित हो गई थी। उन्होंने शुक्रवार को टीएमसी के बागी नेताओं पर आरोप लगाया कि वह पार्टी और बनर्जी द्वारा उनके लिए किए गए कार्यों को स्वीकार करने में विफल रहे हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार ने विधायकों और सांसदों के एक वर्ग द्वारा खुले विद्रोह को जन्म दिया है, जिनमें से कई ने पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संगठनात्मक मामलों पर उनके बढ़ते प्रभाव पर सवाल उठाए हैं।

क्या है मामला?
सोमवार को, पार्टी की मुख्य सचेतक काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 लोकसभा सांसदों के एक समूह ने अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन करने वाले एक अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की, जिससे पार्टी के संसदीय खेमे में फूट पड़ गई। अब तक तीन राज्यसभा सांसदों ने भी इस्तीफा दे दिया है। पिछले सप्ताह पश्चिम बंगाल विधानसभा में हुए हंगामे के बाद संसदीय विद्रोह हुआ, जहां टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 ने पार्टी नेतृत्व से अलग होकर पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार शोवनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय निष्कासित विधायक ऋतब्रता बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में समर्थन दिया।
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इन दोहरे विद्रोहों ने ममता बनर्जी की पार्टी को उस स्थिति में डाल दिया जिसे पर्यवेक्षकों ने 1998 में इसके गठन के बाद से सबसे गंभीर संगठनात्मक संकट बताया है। उस पार्टी के भीतर गहरी दरारें उजागर कर दीं जिसने डेढ़ दशक से अधिक समय तक पश्चिम बंगाल की राजनीति पर अपना दबदबा बनाए रखा था।

ठाकरे ने क्या आरोप लगाया?
ठाकरे ने कहा, 'जो लोग डरपोक और कृतघ्न हैं, जो पार्टी, ममता दीदी और पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा उनके लिए किए गए कार्यों के प्रति उदासीन हैं। वह पार्टी छोड़कर जा रहे हैं।' टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा अभिषेक की नेतृत्व शैली पर सवाल उठाने और यहां तक कि पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को अपने भतीजे और अभिषेक जैसे दिग्गजों में से किसी एक को चुनने का अल्टीमेटम देने पर, ठाकरे ने कहा कि ये बिगड़ती राजनीतिक स्थिति को दर्शाते हैं।

उन्होंने आगे कहा 'अगर हमें (उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली अविभाजित शिवसेना को) न्याय मिला होता तो यह मामला इस स्तर तक नहीं पहुंचता। हमें उम्मीद है कि हमें न्याय मिलेगा। यह एक संवैधानिक मुद्दा है।'

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