दुनियाभर में हिम तेंदुओं की संख्या 4,000 से भी कम रह गई है। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि वैज्ञानिक आज तक उनके 77 फीसदी ठिकानों का पता नहीं कर पाए हैं। विश्व वन्यजीव संगठन (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने हिम तेंदुओं पर पिछले 100 साल में हुए अध्ययनों पर जारी रिपोर्ट में कहा है कि इनकी आवास को लेकर जानकारी और डेटा की कमी से संरक्षण प्रयासों को नुकसान हो रहा है।
भविष्य
माना जा रहा है कि इनके केवल 35 प्रतिशत आवास ही 2070 तक सुरक्षित रहेंगे।
23 प्रतिशत खत्म हो जाएंगे बचे क्षेत्रों से
14 से 19 प्रतिशत क्षेत्र ही संरक्षित। ये बेहद छोटे।
हर साल 450 हिम तेंदुए मारे जा रहे
2016 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 221 से 450 हिम तेंदुए मारे जा रहे हैं। शिकार के अलावा 55 प्रतिशत संख्या मवेशियों को बचाने के लिए हिम तेंदुओं की हत्या होती है।
भारत में 500 से भी कम बचे हैं हिम तेंदुए
लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में पाए जाने वाले हिम तेंदुए की आबादी 500 से भी कम है। इसके फर, हड्डियों और मांस के लिए अवैध शिकार होता है, जिससे इसकी संख्या तेजी से घट रही है। केंद्र इनकी संख्या बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट्स स्नो लेपर्ड के तहत वित्तीय अनुदान शुरू किया है।