भारत के चार कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने वाले स्वर्णिम चतुर्भुज के राष्ट्रीय राजमार्ग खस्ताहाल हैं। यह कार, बस और ट्रक चालकों के लिए सुरक्षित नहीं है। ताजा अध्ययन के मुताबिक, 5431 किमी लंबे दिल्ली-मुंबई और मुंबई-चेन्नई कॉरिडोर का सिर्फ 40 किमी हिस्सा ही पूरी तरह सुरक्षित है।
वहीं, 2795 किमी लंबे दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर का 30 फीसदी और 2636 किमी मुंबई-चेन्नई कॉरिडोर का आधा से अधिक हिस्सा यात्रियों के लिए असुरक्षित है। ऐसा अध्ययन पहली बार हुआ है। इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और वर्ल्ड बैंक समेत कई एजेंसियों ने कराया है।
वर्ल्ड बैंक की वैश्विक सड़क सुरक्षा सुविधा, इंटरनेशनल रोड असेसमेंट प्रोग्राम (आईआरएपी) और एनएचएआई ने इन दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों के कॉरिडोर के सुरक्षा का आकलन और स्टार रेटिंग की है। दुनिया में हुई दुर्घटना के अध्ययन के आधार पर इन राष्ट्रीय राजमार्गों को एक से पांच स्टार तक की रेटिंग दी गई।
इसलिए असुरक्षित है दिल्ली-मुंबई और मुंबई-चेन्नई कॉरिडोर
-5431 किमी लंबा है दिल्ली-मुंबई और मुंबई-चेन्नई कॉरिडोर
-40 किमी हिस्से को ही मिली है 5 स्टार रेटिंग, यानी यह हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित है
-245 किमी हिस्से को मिली है 4 स्टार रेटिंग, यानी यह भी सुरक्षित है
-55 फीसदी हिस्से को मिली है 3 स्टार रेटिंग, यानी यह कुछ हद तक सुरक्षित है
-39 फीसदी हिस्से को 1 या 2 स्टार रेटिंग मिली है, यानी यह हिस्सा यात्रियों के पूरी तरह असुरक्षित है