33 लाख सक्रिय निदेशकों में से 12 लाख से से भी कम सरकार की नई व्यवस्था के तहत नो यॉर कस्टमर्स (केवाईसी) की कसौटी पर खरे उतर पाए हैं। नए प्रवाधान के अनुसार कंपनियों के बोर्ड पदों पर आसीन निदेशकों को अपना पद बरकरार रखने के लिए केवाईसी की प्रक्रिया को पूरा करना था। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने इसके लिए शनिवार की डेडलाइन तय की थी।
कहा जा रहा है कि मंत्रालय अब इस डेडलाइन को आगे नहीं बढ़ाएगा। जिन निदेशकों ने नए दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया है उन सभी के डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर (डीआईएन) को फ्रीज कर लिया जाएगा। साल की शुरुआत में मंत्रालय ने डीआईएन रखने वाले लोगों के लिए 15 सितंबर तक केवाईसी की औपचारिकताएं पूरी करने की डेडलाइन तय की थी।
कंपनियों में निदेशक रखने में होने वाली हेर-फेर, नौकरों को बिना जानकारी के निदेशक बना देने जैसी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए यह फैसला लिया गया था। हालांकि जो निदेशक डेडलाइन पूरी होने से पहले प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाए हैं उनके पास एक आखिरी मौका है। वह चाहे तो पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरा करके और 5000 रुपये का जुर्माना देकर योग्य बन सकते हैं।
देश में 50 लाख डीआईएन जारी किए गए हैं। जिसमें से केवल 33 को ही सक्रिय निदेशक माना जा रहा था। इसमें से भी एक बड़ी संख्या घोस्ट (बेनाम) निदेशक होने की संभावना है। देशभर की शेल कंपनियों को बंद करने की प्रक्रिया का
केवाईसी एक बड़ा हिस्सा है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आखिर कंपनियों का स्वामित्व किसके पास है।
मंत्रालय शेल कंपनियों पर लगातार सख्ती बढ़ा रहा है। रिटर्न ना भरने की वजह से लगभग 3 लाख कंपनियों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा 3 लाख से ज्यादा निदेशकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि यह शेल कंपनियां और इनके फर्जी निदेशक कालेधन के प्रमुख स्रोत हैं। इसी वजह से निदेशक जिनके लिए अपने पैन को लिंक करना अनिवार्य था उन्हें अब डीआईएन के साथ आधार को भी लिंक करना अनिवार्य हो गया है। डीआईएन नंबर धारकों को चार्टर्ड अकाउंटेंट या कंपनी सेक्रेटरी द्वारा प्रमाणित फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाकर उसे जमा कराना होगा।