केंद्रीय गृहमंत्री का पदभार संभालने के बाद अमित शाह ने मंत्रालय की चाल बदल दी। पहले ही साल उन्होंने कई लक्ष्य भेद डाले। गृह मंत्रालय की एक वर्ष की उपलब्धियों में टॉप पर जम्मू और कश्मीर और लद्दाख का नाम आता है।
अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद केंद्र सरकार के कानून अब जम्मू-कश्मीर में लागू होते हैं। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यकों आदि के सशक्तिकरण के लिए जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में केंद्र सरकार की शिक्षा एवं स्वास्थ्य नीतियां लागू की जा रही हैं।
गृह मंत्रालय के अनुसार, जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में निवेश बढ़ाकर स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जा रहा है। नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में समाज के आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है।
जम्मू और कश्मीर (पुनर्गठन) अधिनियम, 2019 के तहत जम्मू और कश्मीर को विधायिका के साथ केंद्र शासित प्रदेश, जबकि लद्दाख को बिना विधानमंडल के केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है।
इसी अधिनियम के अंतर्गत नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास रहने वाले लोगों को दिए गए आरक्षण के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा (आईबी) के पास रहने वाले लोगों को भी सेवाओं और शैक्षिक संस्थानों में तीन फीसदी बढ़ा हुआ आरक्षण मिलेगा।
जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा (विकेंद्रीकरण और भर्ती) अधिनियम के तहत सभी स्तरों पर नौकरियों के लिए डोमिसाइल शर्तों की प्रयोज्यता को और अधिक संशोधित किया गया है।
जम्मू-कश्मीर के लिए प्रधानमंत्री के विकास पैकेज 2015 के तहत पीओजेके और छंब के विस्थापित परिवारों को पुनर्वास पैकेज के दायरे में लाने की बात कही गई है। जम्मू-कश्मीर के 5,300 विस्थापित व्यक्तियों के परिवारों को इसका फायदा पहुंचेगा।
इसके अलावा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सरकारी कर्मियों को 31 अक्टूबर 2019 से 7वें केंद्रीय वेतन आयोग के फायदे देने की घोषणा पहले ही कर दी गई है। 2019 में 3,42,883 व्यक्ति अमरनाथ यात्रा में शामिल हुए।
इस यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए कई नए प्रावधान शामिल किए गए। 2018 की तुलना में पिछले साल लगभग 20 फीसदी ज्यादा यात्री अमरनाथ पहुंचे थे।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 22 नवंबर 2018 को गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती को दुनियाभर में भव्य तरीके से मनाने का प्रस्ताव पारित किया था। भारत ने 24 अक्टूबर, 2019 को पाकिस्तान के साथ करतारपुर साहिब कॉरिडोर समझौते पर हस्ताक्षर किए।
करतारपुर साहिब कॉरिडोर के माध्यम से गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के लिए सालभर की वीजा-मुक्त यात्रा का प्रावधान किया गया। गुरु नानक देव जी के अनुयायियों की यह मांग लंबे समय से चली आ रही थी।
भारतीय सीमा में स्टेट ऑफ आर्ट पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग (पीटीबी) विकसित की गई है। इस पर अनुमानित परियोजना लागत 400 करोड़ रुपये आई है।
प्रतिदिन 5000 से अधिक तीर्थयात्रियों की यात्रा की सुविधा के लिए पीटीबी में 54 इमिग्रेशन काउंटर स्थापित किए गए हैं। तीर्थ यात्रियों को सुल्तानपुर लोधी जाने के लिए देशभर से विशेष रेलगाड़ियां चलती हैं।
यहां पर गुरु नानक देवजी ने ज्ञान प्राप्त किया था। इस जगह को भी हेरिटेज टाउन के तौर पर विकसित किया गया है। ट
गुरुद्वारा करतारपुर साहिब जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराने की सुविधा प्रदान की गई है।