केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसान संगठन अब बड़ा फैसला लेने जा रहे हैं। दिल्ली में नौ नवंबर को 'संयुक्त किसान मोर्चे' (एसकेएम) की दो अहम बैठक होंगी। पहली बैठक में नौ सदस्य भाग लेंगे और उसके बाद एसकेएम की आम सभा की बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में केंद्र सरकार के खिलाफ किसानों के सुपर पावर 'शक्ति प्रदर्शन' को लेकर फाइनल रणनीति बनेगी। लोगों को साथ लेकर सड़क और रेल रोकने या दिल्ली का घेराव, जैसे किसी भी सख्त फैसले पर मुहर लग सकती है। ये भी संभव है कि सभी राज्यों में एक साथ जुलूस निकाले जाएं। जय किसान आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं एसकेएम के वरिष्ठ सदस्य अविक साहा कहते हैं, ये तय है कि 26 नवंबर से पहले कुछ बड़ा होगा। वह जो कुछ भी होगा, उसमें 'जनता' किसानों के साथ रहेगी और सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
व्यक्ति की बजाए व्यक्तित्व को तव्वजो
आंदोलन के प्रति सरकारी बेरुखी से किसान संगठनों के प्रतिनिधि खासे नाराज हैं। यही वजह है कि अब उन्होंने आर-पार की लड़ाई की योजना बनाई है। इस बार किसान संगठन, केंद्र सरकार को घेरने के लिए जो कोई भी बड़ा कदम उठाएंगे, उसमें जनता की सहमति ली जाएगी। इस बार उत्तर भारत या दक्षिण भारत की बात नहीं होगी, पूरे देश में एक साथ किसान संगठनों की रणनीति का असर देखने को मिलेगा। किसान नेता अविक साहा कहते हैं, उन नेताओं को जवाब मिल जाएगा, जो यह कहते हैं कि ये आंदोलन तो खत्म होने जा रहा है। इस आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसमें व्यक्ति की बजाए व्यक्तित्व को तव्वजो दी जाती है। किसी साथी की नाराजगी आपस में हो सकती है, मगर आंदोलन को लेकर कहीं कोई मनमुटाव नहीं है। केंद्र सरकार और भाजपा अभी तक किसान आंदोलन की भावना के साथ खिलवाड़ करती आ रही है। उसे बहुत जल्द अपनी गलती का अहसास होगा।
26 को पूरे होंगे आंदोलन के 365 दिन
एसकेएम के बैनर तले 26 नवंबर को किसान आंदोलन के 365 दिन पूरे हो रहे हैं। केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच अभी बातचीत के आसार नहीं दिख रहे। हालांकि किसान संगठनों ने अपनी ओर से बातचीत के दरवाजे खुले रखे हैं। किसान नेताओं के बीच आपसी खींचतान के बाद भी आंदोलन आगे बढ़ता रहा है। जय किसान आंदोलन के संस्थापक योगेंद्र यादव, एक माह के लिए एसकेएम से निलंबित हैं। वे लखीमपुर खीरी की घटना में मारे गए एक भाजपा कार्यकर्ता के घर शोक प्रकट करने गए थे। उन्होंने इसके लिए एसकेएम को सूचना नहीं दी और न ही वहां जाने की इजाजत ली, इसलिए एसकेएम ने उन्हें एक माह के लिए निलंबित कर दिया। किसान संगठनों के बीच ऐसी चर्चा जारी रही कि आंदोलन के शुरू में किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने जब बिना एसकेएम की मंजूरी लिए पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ने का सार्वजनिक बयान दिया था, तो उन्हें केवल एक सप्ताह के लिए एसकेएम से निलंबित किया गया। योगेंद्र यादव का एक माह का निलंबन 20 नवंबर को खत्म होगा।
निर्णायक लड़ाई से पहले राज्यों के संगठनों की हो रही हैं बैठकें
26 नवंबर से पहले केंद्र सरकार पर दबाव डालने के लिए किसान आंदोलन से जुड़े छोटे-बड़े सभी संगठनों की बैठकें हो रही हैं। नौ नवंबर की एसकेएम की बैठक से पहले सभी राज्यों के प्रतिनिधि अपना होमवर्क पूरा कर यह बताएंगे कि आंदोलन को तेज करने के लिए नया क्या हो सकता है। पंजाब के किसान संगठन चाहते हैं कि ये आंदोलन तेज गति से आगे बढ़ना चाहिए। इसमें रेल रोकने, राष्ट्रव्यापी बंद या राजमार्गों को बाधित करना, ऐसा कोई भी फैसला लिया जा सकता है। संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों का कहना है कि नौ नवंबर से पहले राज्यों की ओर से मिले सुझावों पर चर्चा की जाएगी। अगर दिल्ली के आसपास दोबारा से ट्रैक्टर लाने की नौबत आती है तो उसके लिए कितने किसान तैयार हैं। दिल्ली के भीतर पैदल मार्च की रणनीति पर किसान संगठनों की क्या राय है, इन सब बातों पर चर्चा कर उसे एसकेएम की आम सभा की बैठक में रखा जाएगा।