विकलांग बच्चों के लिए सरकारी सहायता से चलाए जा रहे केन्द्रों में बच्चों को क्या सुविधाएं दी जा रही हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 49 बच्चों को दांत साफ करने के लिए एक ही टूथब्रश से काम चलाना पड़ रहा है और टूथपेस्ट की भी एक ही ट्यूब मिलती है।
हालांकि मामला दो साल पुराना है लेकिन इसे अब बयां किया है राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एचएल दत्तू ने। टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए दत्तू ने बताया कि यह नजारा उन्होंने दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश रहते देखा था।
उन्होंने कहा 'यह जरूरी नहीं है कि मैं उस राज्य का नाम लूं जहां मैंने 49 बच्चों को एक ही टूथब्रश इस्तेमाल करते हुए देखा था। यह हालात विकलांग बच्चों के लिए चलाए जा रहे अधिकतर सरकारी सहायता प्राप्त केन्द्रों की है। जिन्हें सबसे ज्यादा उपेक्षित किया जा रहा है।'
'विकलांग बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए चलाए जा रहे सरकारी केन्द्रों में सरकारी अनुदान की भी कोई कमीं नहीं है लेकिन यहां सुविधाएं बहुत निम्न दर्जे की हैं।' उन्होंने अपने अनुभव से बताया कि 'ओल्ड एज होम में रोजाना जाने और वृद्धों के साथ समय व्यतीत करने से उनमें आत्मविश्वास की वृद्िध तो होती ही है जीवन जीने के प्रति भी नई उमंग का संचार होता है।'
उन्होंने कहा 'हमें पैसे की चोरी रोकने की क्या जरूरत है इसके बजाय हम इसका इस्तेमाल वरिष्ठ नागरिकों और विकलांगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद से दिसंबर में रिटायर होने के बाद उन्होंने अपना कुछ समय बंगलुरू के ओल्ड एज होम में बिताया।'