आदिवासी उग्रवादी संगठनों के हजारों लोगों ने डाले हथियार।
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असम ने शांति की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। विभिन्न आदिवासी विद्रोही संगठनों के हजारों लोगों ने गुरुवार को हुए एक कार्यक्रम में हिंसा का रास्ता छोड़ शांति का रास्ता अपना लिया। समारोह गुवाहाटी के पंजाबरी इलाके में श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में आयोजित किया गया था, जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भाग लिया था।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उत्तर पूर्व में शांति और प्रगति के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन में करीब 1,182 लोग शामिल हुए हैं। इन्होंने हथियार और गोला-बारूद त्याग कर शांति का रास्ता अपनाया है। उन्होंने कहा कि हम सभी लोगों का तहे दिल से स्वागत करते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पांच आदिवासी उग्रवादी समूहों ने हथियार डाल दिए। गौरतलब है, इन समूहों ने पिछले साल सितंबर में केंद्र और असम सरकार के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया था।
आत्मसमर्पण करने वाले सदस्य उग्रवादी ऑल आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी (एएएनएलए), बिरसा कमांडो फोर्स (बीसीएफ), संथाल टाइगर फोर्स (एसटीएफ), आदिवासी कोबरा मिलिटेंट असम (एसीएमए) और आदिवासी पीपुल्स आर्मी (एपीए) के थे।