संसद के शीतकालीन सत्र (16 नवंबर) में वन रैंक वन पेंशन सरकार को टेंशन देगी। आने वाले महीनों में सैनिकों से जुड़े इस मुद्दे के राजनीतिक मायने भी हैं। यूपी, पंजाब और उत्तराखंड से बड़ी संख्या में लोग सेना में जाते हैं और इन राज्यों में विधानसभा का चुनावी बिगुल फूंका जा चुका है। कांग्रेस वन रैंक-वन पेंशन को मुद्दा बनाकर भाजपा की सर्जिकल स्ट्राइक पर श्रेय लेने की मुहिम का काउंटर करना चाहती है।
भूमि अधिग्रहण, दलितों पर अत्याचार, असिहष्णुता जैसे मुद्दे संसद में उठाकर कांग्रेस ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ाई हैं। ऐसे में संसद के शीतकालीन सत्र के ठीक पहले पूर्व सैनिक की आत्महत्या से बदले राजनीतिक माहौल ने कांग्रेस को फिर हथियार दे दिया है। कांग्रेस के रणनीतिकार मानते हैं कि जिस तरह भाजपा सर्जिकल स्ट्राइक के नाम पर चुनावी राज्यों में राजनीतिक बढ़त लेना चाह रही थी। अब उसे उसी भाषा में जवाब मिलेगा। '
कांग्रेस वन रैंक वन पेंशन को लेकर अपनी सरकार में किए गए प्रयासों और फैसलों के साथ मोदी सरकार के वन रैंक वन पेंशन की सच्चाई बताने की भी तैयारी की है। पूर्व रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी को इस काम में लगाया गया है।
वहीं संसद के बाहर कांग्रेस के पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ को भी सक्रिय कर दिया गया है। प्रकोष्ठ के मेजर वेद प्रकाश अहम भूमिका में होंगे।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल की आत्महत्या के बाद सड़कों पर उतरना और अंतिम संस्कार में भिवानी पहुंचकर पार्टी के इरादे साफ कर दिए हैं। दिवाली पर पीएम को राहुल का पत्र भी दर्शाता है कि सैनिकों से जुड़े मुद्दों को लेकर पार्टी लंबी लड़ाई लड़ना चाहती है।