बात दें 370 फीट गहरी अवैध खदान में नदी का पानी आ जाने के कारण 15 लोग 13 दिसंबर से फंसे हुए हैं। उन लोगों को निकालने के लिए कई एजेंसियां काम कर रही हैं। मजदूरों को बचाने के लिए बचाव अभियान अभी भी जारी है। इस जॉइंड रेस्क्यू ऑपरेशन में स्थानीय कर्मियों के अलावा, एनडीआरएफ, भारतीय नौसेना भी शामिल है। खदान से पानी निकालने के लिए हाई पावर पंपों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खदान में अधिक सल्फर होने के कारण शवों का अपघटन हो गया है। फॉरेंसिर एक्सपर्ट्स को डीएनए टेस्ट के लिए बुलाया गया है ताकि मजदूरों की पहचान हो सके।
ईस्ट जयंतिया जिले के डिप्टी कमीश्नर का कहना है, "भारतीय नैसेना द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 3 बजे खदान में 280 फीट की गहराई में एक और शव की खोज की गई है।"
बचाव दल में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि उसी खदान से एक और शव मिला है, जहां से आरओवी वाहन को 16 जनवरी को पहला शव मिला था। मजदूर खदान में अचानक पानी भर जाने के कारण फंस गए थे। इन्हें खदान में फंसे 32 दिन हो चुके हैं। नौसेना को खुदाई के दौरान इनके हेल्मेट, लकड़ी की गाड़ी आदि भी मिले हैं। बचाव दल सभी मजदूरों के शवों को निकालने की पूरी कोशिश कर रहा है।
गुरुवार को जिस मजदूर का शव निकाला गया था, उसकी पहचान पश्चिमी असम के चिरांग जिले के आमिर हुसैन के तौर पर हुई है। पुलिस ने शनिवार को हुसैन का शव उसके परिवार को सौंप दिया है।