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Hiroshima Nagasaki Nuclear Attack: दुनिया का पहला और आखिरी परमाणु हमला, एक झटके में पिघली शरीर की चमड़ी

Sat, 09 Aug 2025 07:35 AM IST
संध्या स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

आज हिरोशिमा नागासाकी में परमाणु हमले के 80 वर्ष पूरे हो गए है। ये हमला इतना दर्दनाक था कि जापान में जो लोग इस हमले में बच गए थे वो आज भी इस दर्द को भूल नहीं पाए हैं।
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हिरोशिमा नागासाकी परमाणु हमला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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6 अगस्त 1945 को जापान में रोज की तरह एक सामान्य सुबह हुई थी। हर कोई अपने रोजमर्रा के काम को निपटा रहा था। कई लोग दफ्तर जा रहे थे। बच्चे स्कूल में पढ़ रहे थे। तभी जापानी समय के अनुसार 8:15 पर हिरोशिमा शहर के बीच में एक तेज धमाका हुआ, आंखों को अंधा कर देने वाली तेज रोशनी चमकी, आसमान की तरफ एक बड़ा धुएं का गुबार उठा और सब कुछ तबाह हो गया। इस सुबह ने हिरोशिमा के लोगों की जिंदगी में तबाही मचा दी। एक झटके में हजारों लोग मारे गए। यह हिरोशिमा पर परमाणु हमला था जो अमेरिका की तरफ से कराया गया था। 

 

इसके बाद 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के एक और शहर नागासाकी पर दूसरा परमाणु हमला किया। इन दोनों हमले में लाखों निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इस हमला इतना भयानक था कि धमाके की आवाज से लोग बहरे हो गए। इसकी तेज रोशनी ने लोगों की अंधा कर दिया। धमाके से उत्पन्न होने वाली गर्मी से लोगों का चमड़ी पिघल गई थी। आज इस हमले को 80 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

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परमाणु बम (Ai Photo) - फोटो : अमर उजाला

हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमला 

अमेरिकी ऊर्जा विभाग के द्वारा चलाए गए मैनहैटन प्रोजेक्ट की एक रिपोर्ट से पता चला कि 6 अगस्त, 1945 की सुबह, एनोला गे नामक एक बी-29 बमवर्षक विमान तिनियान द्वीप से उड़ान भरकर उत्तर-पश्चिम दिशा में जापान की ओर बढ़ रहा था। बमवर्षक का मुख्य लक्ष्य हिरोशिमा शहर था। हिरोशिमा की नागरिक आबादी लगभग 3,00,000 थी और यह एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र था, जिसमें लगभग 43,000 सैनिक थे। 509वें कम्पोजिट ग्रुप के कमांडर कर्नल पॉल टिब्बेट्स द्वारा संचालित बमवर्षक विमान ने हिरोशिमा समय के अनुसार लगभग 8:15 बजे एनोला गे ने शहर के ऊपर अपना 9,700 पाउंड का यूरेनियम गन-प्रकार का बम "लिटिल बॉय" गिरा दिया। 

जापान इससे पहले हिरोशिमा के हमले से उबर ही पाता कि अमेरिका ने ठीक तीन दिन बाद जापान के नागासाकी पर हमला कर दिया। 9 अगस्त, 1945 को अमेरिकी वायुसेना के मेजर चार्ल्स स्वीनी द्वारा संचालित "बॉक्सकार" नामक यूएसएएएफ बी-29 विमान से "फैट मैन" गिराया गया था। इस बम का वजन 10,000 पाउंड था। विस्फोट की शक्ति 21 किलोटन थी, जो हिरोशिमा बम से 40 प्रतिशत अधिक थी।

हमले ने सब कुछ तबाह कर दिया था। (Photo: AI) - फोटो : अमर उजाला

इतना दर्दनाक था हमला

यह हमला कितना घातक और दर्दनाक था इस बात का पता इसी से लगाया जा सकता है कि हमले में हजारों लोगों की मौत उसी समय हो गई थी। वहीं कुछ लोग जो इस हमले के संपर्क में आए थे उनकी मौत दो से तीन महीने के अंदर हो गई थी।  साल के अंत तक इन बमबारी में करीब 2 लाख लोग मारे गए थे। 

हमले में तबाह हुई संरचना (Photo: AI) - फोटो : अमर उजाला
  • हिरोशिमा का दर्द
विस्फोट की चपेट में सीधा आने वाले लोग उसी समय मारे गए, उनके शरीर उसी समय जल कर खाक हो गए। आस-पास के पक्षी हवा में ही आग की लपटों की चपेट में आ कर राख हो गए। सफेद रोशनी बड़े फ्लैश बल्ब के जैसी लगी जिसके कारण लोगों कपड़ों के काले निशानों को त्वचा पर और शरीरों की परछाइयों को दीवारों पर छाप दिया। विस्फोट को नजदीक से देखने वाले लोग बताते है कि यह रोशनी में आंखों को अंधा करने वाली चमक और तेज गर्मी के साथ आई थी। विस्फोट इतना तेज था कि असर 6,400 फीट की दूरी पर भी देखा गया। आसपास के लोग अपने पैरों पर खड़े नहीं रह सके। घरों से शीशे टूट गए। मज़बूत इमारतों को छोड़कर सब कुछ तहस नहस हो गया। ग्राउंड जीरो से एक मील के दायरे में लगभग हर संरचना नष्ट हो गई। शहर की केवल 10 प्रतिशत इमारतें ही सुरक्षित रहीं। जब तक लोगों को बचाने के काम शुरू होता शहर की लगभग आधी आबादी मर चुकी थी। हमले के कई घंटों बाद तक जापानी सरकार को ठीक से पता ही नहीं चला कि क्या हुआ था। वास्तव में क्या हुआ था, इसकी पहली पुष्टि केवल सोलह घंटे बाद संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा बमबारी की घोषणा के साथ हुई।

जेनबाकु डोम (Photo: AI) - फोटो : अमर उजाला
  • नागासाकी का दर्द

नागासाकी, क्यूशू के पश्चिमी तट पर एक औद्योगिक केंद्र और प्रमुख बंदरगाह था। हिरोशिमा की तरह, बी-29 द्वारा बमबारी शुरू करने से पहले ही सुबह-सुबह हवाई हमले की चेतावनी साफ हो चुकी थी। 1 अगस्त को नागासाकी पर एक छोटे से हमले से शहर के कुछ हिस्सों को, खासकर स्कूली बच्चों को, खाली करना पड़ा था। जब बम फटा, तब शहर में लगभग 2,00,000 लोग मौजूद थे। जल्दबाजी में दागे गए इस बम का विस्फोट शहर के दो प्रमुख ठिकानों, दक्षिण में मित्सुबिशी स्टील एंड आर्म्स वर्क्स और उत्तर में मित्सुबिशी-उराकामी टॉरपीडो वर्क्स के ठीक बीच हुआ। अगर बम दक्षिण में और आगे फटता, तो शहर के आवासीय और व्यावसायिक केंद्रों को कहीं ज़्यादा नुकसान होता।

बताया जाता है कि फैटमैन का धमाका  लिटिल बॉय से ज्यादा तेज था, लेकिन नागासाकी में हिरोशिमा जितना नुकसान नहीं हुआ था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि नागासाकी के आसपास पहाड़ियां है। जिसने बम का विस्फोट, गर्मी और रेडिएशन के प्रभाव को कम करने का काम किया। विस्फोट ने लगभग 43 वर्ग मील के कुल क्षेत्र को प्रभावित किया। विस्फोट स्थल से एक किलोमीटर (0.62 मील) के अंदर आदमी और जानवर लगभग तुरंत मर गए। इनमें से लगभग 8.5 वर्ग मील जलमग्न था, और 33 वर्ग मील क्षेत्र थोड़ा बसा हुआ था। कई सड़कें और रेल लाइनें ज़्यादा नुकसान से बच गईं। डेढ़ मील के दायरे में लगभग सभी घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए थे। नागासाकी के 52,000 घरों में से 14,000 नष्ट हो गए और 5,400 गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे। केवल 12 प्रतिशत घर ही सुरक्षित बच पाए। पानी की लाइने टूटने से आग बुझाने के काम में बाधा आई, और छह हफ़्ते बाद भी शहर पानी की कमी से जूझ रहा था। 

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तबाही की तस्वीर (PHoto: AI) - फोटो : अमर उजाला

अमेरिका हिरोशिमा पर ही क्यों किया पहला परमाणु हमला 

अब बात करते हैं कि आखिर हिरोशिमा को ही क्यों निशाना बनाया था? दरअसल, द्वितीय विश्व युद्ध के समय यह शहर जापान का अहम सैन्य ठिकाना था। इसके अलावा कहा जाता है कि अमेरिका ने ज्यादा आबादी वाले जापानी द्वीपों को निशाना बनाने से परहेज किया गया था। यही वजह है कि यहां परमाणु बम गिराया गया, जिसने इस शहर को पूरी तरह तबाह कर दिया। 



 
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