भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों में अप्रत्यक्ष रूप से निशाने पर रहने वाली बसपा अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को राज्यसभा में खुलकर अपना पक्ष रखा और प्रधानमंत्री पर जमकर कटाक्ष किए। मायावती ने कहा नोटबंदी के फैसला बिना तैयारी, कुछ खासकर लोगों का लाभ पहुंचाकर, स्वार्थ के तहत लिया गया है इसलिए आर्थिक इमरजेंसी सा माहौल है। सरकार अपनी कमजोरी को छुपाने के लिए विपक्षी दलों पर आरोप लगा रहे हैं।
मायावती ने कहा कि विरोधी पार्टियों खासकर बसपा के लिए ये कहना कि दाल में कुछ काला है ठीक नहीं है। बसपा राजनीतिक पार्टी बाद में है पहले एक मूवमेंट है। गरीब, मेहनतकश और मध्यम वर्ग के खून पसीने की कमाई की सदस्यता और सहयोग ने इसे यहां तक पहुंचाया है। हम उन पार्टियों की तरह नहीं जो पूंजीपतियों, धन्नासेठों और फर्जी सदस्य बनाते हैं।
मायावती ने प्रधानमंत्री के बयान कि दस महीने से तैयारियां चल रही थीं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब तैयारियां चल रही थीं तो इतनी अफरातफरी क्यों है और फिर पचास दिन का समय अब क्यों। अगर दस महीने से तैयारियां होती तो भावनात्मक ड्रामेबाजी नहीं करनी पड़ती। वास्तव में दस महीनों में पीएम ने तैयारी जरूर की लेकिन धन्नासेठों, कुछ पूंजीपतियों और पार्टी के नेताओं का कालाधन ठिकाने लगवाने में। जबकि गरीब, किसान, मजदूर लाइन में खड़ा है।