उत्तराखंड केचमोली में चीनी सेना की घुसपैठ पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच विरोधाभास सामने आया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार को कहा कि 19 जुलाई को चमोली में घुसपैठ की घटना उजागर हुई। इसकी रिपोर्ट केंद्र को भेज दी गई थी। लेकिन इस सवाल पर गृहमंत्री किरेन रिजिजू की अलग राय है।
रिजिजू केमुताबिक केंद्र इस मामले की रिपोर्ट मंगवा रहा है। केंद्र यह सुनिश्चित करेगा कि यह घटना वाकई घुसपैठ थी या नहीं। सूत्रों ने बताया कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने भी इस मामले की रिपोर्ट गृहमंत्रालय को भेज दी है। गौरतलब है कि पिछले महीने अरुणाचल प्रदेश में भी करीब 250 चीनी सैनिक घुस आए थे।
हरीश रावत के मुताबिक अच्छी बात यह है कि चीनी सेना ने वहां से बहने वाली नहर से कोई छेड़ छाड़ नहीं की। उस इलाके में दौरे पर गए आईटीबीपी के आपत्ति पर चीनी सैनिक वापस चले गए। रावत ने पूरी घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि यह गंभीर बात है। उन्होंने केंद्र से इलाकेमें चौकसी बढाने की अपील की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र इस बारे में गंभीर कदम उठाएगा।
उत्तराखंड का 350 किलोमीटर चीनी सीमा से लगा है। आईटीबीपी सूत्रों के मुताबिक वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर दोनों देशों केबीच धारणा का फर्क है क्योंकि अबतक ठोस सीमा नहीं खींची जा सकी है। दोनों देशों ने अपने हिसाब से काल्पनिक लाईन खींच रखी है। इसी फर्क का बहाना लेकर चीनी सैनिक अक्सर शैतानी पर उतर आते हैं। लेकिन आईटीबीपी के जोर जबरदस्ती के बाद वापस भी चले जाते हैं।