राजस्थान के कोटा से सांसद ओम बिड़ला को सत्रहवीं लोकसभा के लिए अध्यक्ष चुन लिया गया है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जैसे दलों के समर्थन के बाद उन्हें अध्यक्ष पद के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।
मेनका गांधी और राधामोहन सिंह जैसे बड़े नामों की चर्चा के बाद भी ओम बिड़ला का अध्यक्ष पद के लिए चुना जाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की भाजपा के उसी दृष्टिकोण को प्रमाणित करता है जिसमें उन्होंने नाम से ज्यादा काम को महत्त्व दिए जाने की बात कही थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के नवनिर्वाचित सांसदों लोकसभा में ‘छपास’ और ‘दिखास’ से बचने और आगे बढ़कर काम करने की सलाह दी थी। ओम बिड़ला का नाम आगे बढ़ाकर नरेंद्र मोदी ने अपनी उसी नसीहत को हकीकत में तब्दील कर दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बिड़ला की सेवा भावना की प्रशंसा की। दरअसल, ओम बिड़ला के सामाजिक कार्यों ने ही उनकी अपेक्षाकृत साधारण प्रोफाइल को बड़े नामों के सामने ज्यादा भारी साबित कर दिया। अपने क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा के समय भी उन्होंने ‘एक मुट्ठी अन्न राहत अभियान’ और ‘कंबल प्रकल्प’ चलाकर हजारों किसानों-गरीब परिवारों की मदद की थी। वे नरेंद्र मोदी के विशेष अनुराग के क्षेत्र दिव्यांगजनों के लिए विशेष साइकिल उपलब्ध करवाते रहे हैं।
'काम को ईनाम देने की सोच'
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुदेश वर्मा ने ओम बिड़ला के अध्यक्ष बनने पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने बिड़ला का चयन करके सबको यह साफ संदेश दिया है कि पार्टी में उन्हीं को महत्त्व दिया जाएगा जो जमीन पर काम करेंगे। वर्मा के मुताबिक भाजपा की यही सोच उसे बाकी दलों से अलग करती है और लोगों में मिल रही स्वीकार्यता इसका प्रमाण है।