आज लोकसभा में अजीबो-गरीब वाकया देखने को मिला जब आम आदमी पार्टी के लोकसभा सांसद भगवंत मान ने शून्य काल में विषय बदल दिया। इसपर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि मैं पढ़ा-लिखा स्पीकर हूं, विषय बदलने से पहले अनुमति लीजिए।
संसद के दोनों सदनों में प्रश्नकाल के तुरंत बाद की अवधि को शून्य काल (जीरो आवर) कहते हैं। इसका समय 12 बजे से लेकर 1 बजे तक होता है। दोपहर 12 बजे शुरू होने के कारण इसे शून्य काल कहा जाता है। शून्य काल की शुरुआत 1960 के दशकों में हुई थी, जब बिना पूर्व सूचना के बिना देर किए लोक महत्व के विषय उठाने की प्रथा शुरू हुई थी। इस अवधि में आवश्यक दस दिनों के पूर्व नोटिस के बगैर काफी महत्वपूर्ण मामलों को उठाया जा सकता है।