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जंग के बीच शांति की उम्मीद: ब्रिक्स में पश्चिम एशिया पर चर्चा, ओम बिरला बोले- संवाद से बनेगा सकारात्मक माहौल

सार

12वें ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन में पश्चिम एशिया संकट, वैश्विक शांति और डिजिटल तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल पर चर्चा होगी। ओम बिरला ने अमर उजाला से बातचीत में संवाद और कूटनीति की अहमियत बताई। सम्मेलन से देशों के बीच सहयोग को कैसे बढ़ावा मिलेगा? आइए, जानते हैं...
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ओम बिरला से खास बातचीत - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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सोमवार से शुरू हो रहे 12वें ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन में चर्चा केवल विधायी और तकनीकी मुद्दों तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पश्चिम एशिया संकट जैसे सुलगते भू-राजनीतिक मुद्दे पर भी मंथन होगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच संसदों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे इन चुनौतियों पर चर्चा कर शांति व स्थिरता के पक्ष में सर्वसम्मत राय बनाएं।

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उन्होंने कहा कि यह मूल रूप से राष्ट्राध्यक्षों का विषय है, लेकिन इन विषयों पर जब विभिन्न देशों के सांसद आपस में चर्चा करेंगे, तो इससे एक सकारात्मक वैश्विक वातावरण बनेगा। बिरला ने जोर देकर कहा कि दुनिया के सभी देशों में शांति होगी, तभी समावेशी आर्थिक प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि हाल ही में ब्रिक्स राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन ने यह साबित किया है कि भारत किस तरह ईरान और यूएई जैसे देशों के बीच के मतभेदों को पाटने की कूटनीतिक क्षमता रखता है। अब उसी संवाद और गतिशीलता को ब्रिक्स संसदीय मंच के स्तर पर भी आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

डिजिटल तकनीक के मानव-केंद्रित इस्तेमाल पर चर्चा
दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय ‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना’ है। इसमें संस्थागत मजबूती, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल तकनीक के मानव-केंद्रित इस्तेमाल, वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और सतत विकास पर विचार होगा। बिरला ने कहा कि एआई का इस्तेमाल जवाबदेही और जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।

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