'इस भवन की उच्च गरिमा, प्रतिष्ठा और मर्यादा'
बिरला ने मंलगवार को सदन में कहा कि संसद एक पवित्र स्थल है। इस भवन की उच्च गरिमा, प्रतिष्ठा और मर्यादा है। इसी भवन में हमने आजादी प्राप्त की है। यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था है। इस संस्था में लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को पूरा किया जाता है। सहमति-असहमित हमारे लोकतंत्र की परंपरा रही है, जो संविधान बनते समय भी हमने अभिव्यक्त की थी।
'प्रतिपक्ष के बड़े नेताओं का आचरण भी संसदीय व्यवहार के अनुकूल नहीं'
उन्होंने कहा, 'मेरा आपसे आग्रह है कि हमें संसद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। पिछले कुछ दिनों से मैं देख रहा हूं कि संसद परिसर में जिस प्रकार के प्रदर्शन किए जा रहे हैं, जिस प्रकार के नारे, पोस्टर और मुखौटों का उपयोग किया जा रहा है, वह न सिर्फ अशोभनीय है, बल्कि हमारी नियम प्रक्रियाओं और संसदीय परंपराओं के अनुरूप भी नहीं है। मुझे बहुत अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि इसमें प्रतिपक्ष के बड़े नेताओं का आचरण-व्यवहार भी संसदीय व्यवहार के अनुकूल नहीं है।'
'संसद की गरिमा, परंपरा, मर्यादा और प्रतिष्ठा को बनाए रखें'
इस पर कांग्रेस और कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों ने टोका-टोकी करते हुए कहा कि अध्यक्ष को सत्तापक्ष का भी नाम लेना चाहिए। इस पर बिरला ने कहा कि चाहे सत्तापक्ष हो या प्रतिपक्ष हो, सभी दलों के लोग संसद की गरिमा, परंपरा, मर्यादा और प्रतिष्ठा को बनाए रखें। मर्यादित आचरण रखेंगे तो जनता में सकारात्मक संदेश जाएगा। इस लोकतंत्र के मंदिर के प्रति लोगों की बहुत गहरी आस्था और विश्वास है। आजादी के 75 वर्ष में हमने यहां चर्चा, संवाद और तीखी आलोचना देखी है। यह यहां की परंपराएं रही हैं।
'मुझे आशा है कि आप सकारात्मक सहयोग करेंगे'
उन्होंने सांसदों से अपील की कि आप सकारात्मक सहयोग करें। जो मुद्दे हैं, उन पर आप आकर चर्चा करें। सत्तापक्ष से प्रतिपक्ष के लोग बैठकर चर्चा करें, सदन को चलाने का प्रयास करें। प्रश्नकाल का महत्वपूर्ण समय होता है। मुझे आशा है कि आप सकारात्मक सहयोग करेंगे।
'सदन गरिमा और मर्यादा से चलेगा'
इसी दौरान कांग्रेस और उसके कुछ सहयोगी दलों ने अपने मुद्दे उठाने का प्रयास किया और हंगामा करने लगे। इस पर बिरला ने कहा कि सदन गरिमा और मर्यादा से चलेगा। उन्होंने पूर्वाह्न करीब 11 बजकर पांच मिनट पर सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।