हो सकता है कि देश ललिता बाबर का नाम भूल गया हो, उनकी उपलब्धियों का भान भी किसी को न हो, लेकिन महाराष्ट्र के मराठा आंदोलन में एक चेहरा ललिता बाबर का भी है, जिसे पूरा देश पहचान सकता है। ये वही ललिता बाबर है, जिन्होंने रियो ओलंपिक के 3000 मीटर स्टीपलचेज प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया था। ललिता इस इवेंट में दसवें स्थान पर रही थीं, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से 125 करोड़ भारतीयों का दिल जीत लिया।
रियो ओलंपिक की तैयारियों में जुटी ललिता बाबर ऊंटी में ट्रेनिंग कर रही थी, जब उन्होंने महाराष्ट्र के अहमदनगर के कोपार्डी में 14 साल की युवती से गैंगरेप और मर्डर की घटना के बारे में सुना। इस घटना ने ललिता बाबर को आक्रोश से भर दिया और डेढ़ महीने बाद वो अपने सुरक्षाकवच से बाहर निकलीं।
ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के डेढ़ महीने बाद ललिता बाबर रविवार को पुणे में हुए मराठा आंदोलन में उतरीं। मराठा आंदोलन के प्रदर्शनकारियों के साथ ललिता बाबर ने डेक्कन चौक से काउंसिल हॉल तक प्रदर्शन में हिस्सा लिया।