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ऑफलाइन पर झुका इलाहाबाद विश्वविद्यालय, MHRD के पत्र का इंतजार

Tue, 10 May 2016 06:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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सभी पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाओं में ऑफलाइन का विकल्प देने के मुद्दे पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन झुकने के लिए तैयार हो गया है, लेकिन इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के निर्देश का अब भी इंतजार है।
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हालांकि, कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू का कहना है कि  मंत्रालय में उनकी बात हुई है। उधर, से ऑफलाइन के विकल्प दिए जाने का संकेत दिया गया है, लेकिन सोमवार रात नौ बजे तक कोई निर्देश नहीं मिला था। उनका कहना है कि सुबह तक मंत्रालय से कोई निर्देश मिलता है तो उसे लागू किया जाएगा। छात्रों से वार्ता के लिए पहुंचे शिक्षकों के लिखित आश्वासन के बाद छात्रों ने आमरण अनशन तोड़ दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की कई अन्य मांगें भी मान ली हैं। छात्र इसे बड़ी जीत के रूप में ले रहे हैं और उन्होंने परिसर में जुलूस भी निकाला।

ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने समेत विभिन्न मांग को लेकर छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह, उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू, संयुक्त मंत्री श्रवण कुमार जायसवाल, मानस शर्मा, अजीत यादव विधायक, पवन, सद्दाम, सूर्य प्रकाश मिश्रा आदि ने बुधवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया था। हालत बिगड़ने पर पुलिस ने रविवार को आधी रात के बाद ऋचा को अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन अन्य अनशनकारी भाग गए थे।
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सोमवार को सुबह वे सभी फिर छात्रसंघ भवन पहुंच गए। सभी संगठन की बैठक में छात्रों ने सोमवार को आर-पार की लड़ाई की घोषणा की थी। इसके अनुसार विद्यार्थियों का छात्रसंघ भवन जमावड़ा भी हुआ। छह दिन तक चले अनशन के दौरान भाजपा, सपा, कांग्रेस, भाकपा समेत ज्यादातर दलों के सांसदों, विधायकों और नेताओं ने छात्रसंघ भवन पहुंचकर छात्रों का समर्थन किया था। भाजपा नेताओं का एक दल लगातार एमएचआरडी मंत्री स्मृति ईरानी के भी संपर्क में रहा। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन पर काफी दबाव बन गया था।

इस बाबत कुलपति के निर्देश पर डीन प्रोफेसर ए.सत्यनारायण, प्रोफेसर जगदीश नारायण, प्रोफेसर राकेश खन्ना, अध्यापक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर रामसेवक दुबे, डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर हर्ष कुमार, चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसरन एनके शुक्ला, प्रोफेसर एए फातमी, डॉ.पंकज कुमार, प्रोफेसर स्मिता अग्रवाल आदि की टीम ने छात्र नेताओं से वार्ता की। इसी दौरान भाजपा सांसद विनोद सोनकर का फोन छात्रों के पास पहुंचा। उनका कहना था कि वे इस समय मंत्रालय में ही हैं और स्मृति ईरानी ने ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने समेत छात्रों की अन्य मांगें मान ली हैं। इस आशय का फैक्स भी विश्वविद्यालय में पहुंच गया है। इस पर शिक्षकों ने लिखकर दिया कि यदि मंत्रालय या यूजीसी से इस तरह का कोई निर्देश मिलता है तो विश्वविद्यालय प्रशासन उसे लागू कर देगा।

चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर एनके शुक्ला का कहना है कि मंत्रालय या यूजीसी से पत्र आने के बाद जल्द फैसला लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। शिक्षकों के साथ वार्ता में छात्रसंघ पदाधिकारियों और अनशनकारियों के अलावा विवेकानंद पाठक, जिया कौनैन रिजवी, अखिलेश गुप्ता, चंदन सिंह आदि छात्र शामिल रहे।

जीत पर छात्रसंघ भवन पर मना जश्न, निकाला जुलूस

- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए सोमवार जश्न मनाने का दिन रहा। हालांकि ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा का विकल्प अभी मिला नहीं है लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद इसकी उम्मीद प्रबल हो गई है। मंगलवार को इस आशय का पत्र मिलने की भी उम्मीद है। छात्र-छात्राओं ने इसे सामूहिक जीत बताते हुए जमकर जश्न मनाया। ढोल-नगाडे़ के साथ उन्होंने परिसर में जुलूस भी निकाला।

शिक्षकों से लिखित आश्वासन मिलने के बाद शिक्षकों के अलावा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधाकांत ओझा, भाजपा नेता रामरक्षा द्विवेदी आदि ने जूस पिलाकर अनशन तोड़वाया। इसके बाद छात्रों ने अनशन पर बैठे नेताओं को कंधे पर बैठाकर परिसर में घुमाया। इसी दौरान ढोल भी पहुंच गया और वे जमकर झूमे। इस दौरान सभी दलों के वरिष्ठ नेता भी पहुंचे थे और इसे छात्रों जीत बताई। छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह का कहना था कि यह छात्रों की जीत है।

ऑफलाइन का विकल्प मिलने से विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह का कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति को पता चल गया होगा कि यहां का छात्र दमन का प्रतिकार करके विजय पाना जानता है। महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू का कहना था कि छात्रों की ताकत बांटने वालों को करारा जवाब है। विश्वविद्यालय का छात्र छात्रसंघ के साथ था और यह उसी की जीत है। विवेकानंद पाठक, अखिलेश गुप्ता, अमरेंदू सिंह, मानस शर्मा, अजीत यादव विधायक, जिया कौनैन रिजवी, सूर्य प्रकाश मिश्रा ने भी इसे छात्रों की जीत बताई। एबीवीपी के शैलेंद्र मौर्य, अश्वनी मौर्य, अजीत उपाध्याय आदि ने फैसले का स्वागत किया। छात्र स्वतंत्रता संघर्ष  के मोहम्मद सलमान, सीएमपी डिग्री कालेज के प्रशांत कुमार, भूपेंद्र श्रीवास्तव, पूजा मिश्रा, सुमित कुमार, विशाल श्रीवास्तव, प्रखर यादव आदि ने इसे ऐतिहासिक जीत बताया।
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ऑफलाइन पर मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट

- फोटो : PTI
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा में ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने की मांग को लेकर बने चौतरफा दबाव के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने रिपोर्ट भेज दी है। ऑफलाइन के मुद्दे पर कुलपति दफ्तर पर दो मई को आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया था।

इसके बाद छात्रसंघ पदाधिकारियों की अगुवाई में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी रहा। बुधवार से उन्होंने अनशन शुरू कर दिया। उनके इस आंदोलन को राजनीतिक दलों का व्यापक समर्थन मिला और नेताओं ने एमएचआरडी मंत्री से भी मुलाकात की। इसके अलावा अनशन पर बैठे छात्रों की तबीयत बिगड़ने लगी। इससे बने दबाव के बाद मंत्रालय ने सोमवार को इस बाबत रिपोर्ट मांगी। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रों से हुई वार्ता में हुए फैसले के साथ सभी कोर्सेज के लिए पहुंचे आवेदनों तथा अन्य बिंदुओं को ध्यान में रखकर तैयार रिपोर्ट की गई है। शाम को रिपोर्ट मंत्रालय भेज भी दी गई। ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने के मुद्दे पर अब मंत्रालय के पत्र का इंतजार है।

डबल पीजी के लिए चाहिए 60 फीसदी अंक
शिक्षकों के साथ वार्ता में छात्रसंघ पदाधिकारियों ने सात सूत्रीय मांग पत्र रखा था। इनमें से कई मांगे विश्वविद्यालय प्रशासन ने मान ली है। ऑफलाइन के विकल्प की मांग मंत्रालय के निर्देश पर निर्भर करेगा। दो विषयों में परास्नातक करने के इच्छुक विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ी राहत दी है। 80 फीसदी अंक की बाध्यता घटाकर 60 प्रतिशत कर दी गई है। पिछले दिनों अराजकता के आरोप में 17 विद्यार्थियों को निलंबित कर दिया गया था। छात्र कार्रवाई वापस लेने की मांग कर रहे थे। इस पर शिक्षकों ने लिखित आश्वासन दिया कि इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार होगा। जो लोग उस घटना में शामिल नहीं होंगे उनका निलंबन वापस ले लिया जाएगा लेकिन अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। आंदोलनों के दौरान छात्रों पर लिखाए गए मुकदमे वापस लेने की मांग पर शिक्षकों का कहना था कि इस बारे में जरूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ओएसडी की नियुक्ति की जांच कराने की मांग पर शिक्षकों का कहना था कि इस बारे में वे कुछ नहीं कर सकते हैं। ओएसडी की नियुक्ति एक प्रक्रिया के अंतर्गत हुई है और उन्हें हटाने के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
 
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