गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को कथित तौर पर गैर-कानूनी एफसीआरए नोटिस भेजने के मामले में गिरफ्तार गृह मंत्रालय के अवर सचिव आनंद जोशी ने सीबीआई के सामने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। जोशी ने सीबीआई की पूछताछ में कहा है कि फोर्ड फाउंडेशन पर प्रतिबंध हटाने के सिलसिले में 200 से 250 करोड़ रुपये के लेन-देन की बात चल रही थी। साथ ही जोशी ने खुद पर लगे आरोपों और उच्च अधिकारियों के फैसले पर कई तकनीकी सवाल खड़े किए हैं।
सीबीआई इस मामले में जोशी के वरिष्ठ अधिकारी और शिकायतकर्ता अतिरिक्त सचिव बीके प्रसाद से भी पूछताछ करेगी। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक जोशी के बयान को रिकार्ड पर लिया गया है। इसके सभी पहलुओं की जांच होगी। चार दिन तक रहस्यमयी तरीके से गायब जोशी को सीबीआई ने रविवार शाम को अपने गिरफ्त में ले लिया था। उच्च पदस्थ सरकारी सूत्रों के मुताबिक जोशी ने जांच एजेंसी को शुरुआती पूछताछ में बताया है कि अंतरराष्ट्रीय एनजीओ फोर्ड फाउंडेशन की इंडिया चैप्टर की तरफ से प्रतिबंध हटाने के लिए नवंबर-दिसंबर महीने में 200 से 250 करोड़ रुपये की पेशकश की जा रही थी।
लेकिन वह तकनीकी कारणों से इसके विरोध में थे। सूत्रों के मुताबिक जोशी का तबादला 31 दिसंबर को फॉरेनर्स डिविजन से पार्लियामेंट डिविजन में कर दिया गया। इनके तबादले के करीब 15 दिन बाद फोर्ड फाउंडेशन को प्रतिबंध सूची से हटा दिया गया। तकनीकी तौर इस फैसले के बाद फोर्ड को विदेशी धन के लिए गृह मंत्रालय के मंजूरी की जरूरत नहीं थी।