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आपत्तिजनक कंटेंट: ट्विटर अमेरिका की ज्यादा सुनता है, 99 फीसदी मामलों में उसने भारत की बात नहीं मानी

प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली, Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Sat, 17 Jul 2021 03:41 PM IST

सार

भारत के प्रति ट्विटर कितना भेदभाव करता है, यह आंकड़ों से जाहिर है। भारत सरकार ने दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले 2020 के आखिरी छह महीनों में ट्विटर अकाउंट्स से जुड़ी सबसे ज्यादा जानकारी मांगी थी। पिछले साल के पहले छह महीने के मुकाबले आखिरी छह महीने में भारत ने ट्विटर को 38 फीसदी ज्यादा अनुरोध भेजे। इसके बावजूद ट्विटर ने सिर्फ एक फीसदी मामले में भारत की बात मानी, जबकि अमेरिका के साथ उसने ऐसा नहीं किया।
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Twitter - फोटो : amarujala


25 फीसदी अनुरोध के साथ भारत पहले नंबर पर

ट्विटर के आंकड़ों के मुताबिक, यूजर की जानकारी के लिए 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2020 तक जितने भी अनुरोध उसे मिले, उसमें अकेले भारत का हिस्सा 25 फीसदी था, जबकि अमेरिका की कुल हिस्सेदारी 22 फीसदी थी। ट्विटर ने 99 फीसदी मामलों में भारत के अनुरोध को खारिज कर दिया, जबकि इसी अवधि के लिए अमेरिका के 59% अनुरोधों पर उसने कार्रवाई की। 


पहली बार अमेरिका पीछे

कंपनी का कहना है हमने 2012 से अपनी पारदर्शिता रिपोर्ट प्रकाशित करना शुरू किया था। यह पहली बार हुआ है, जब अमेरिका सबसे ज्यादा अनुरोध भेजने वाले देशों में शामिल नहीं है और भारत उससे आगे निकल गया है। इस बार भारत के मुकाबले अमेरिका यूजर का डेटा हासिल करने के मामले में दूसरे नंबर पर रहा। 17 फीसदी अनुरोधों के साथ जापान तीसरे नंबर पर और 14 फीसदी अनुरोधों के साथ फ्रांस चौथे नंबर पर है। जुलाई से दिसंबर 2000 की अवधि के दौरान दुनियाभर से मिले अनुरोधों में 78 फीसदी हिस्सा इन चारों देशों का है। 


ट्विटर ने साफ कहा- जब तक किसी की जान को खतरा नहीं, हम खाते की जानकारी नहीं देते

कंपनी ने एक ब्लॉग में लिखा है कि पिछले एक साल में हमने गंभीर वैश्विक चुनौतियों का सामना किया है, जिसमें कोरोनावायरस समेत सरकारों की वह कोशिश भी है, जिसमें वह विशेष रूप से ट्विटर को सीमित करने के ठोस प्रयास कर रही है। 


कंपनी के मुताबिक, कंटेट को हटाने या रोकने के लिए यूजर के अकाउंट्स की जानकारी देने के लिए जहां अनुचित मांग होती है, हम उसे नहीं मानते हैं। यदि आपातकालीन अनुरोध जैसे किसी की मृत्यु या किसी को गंभीर चोट आने का खतरा होगा तो ऐसी स्थिति में कंपनी यूजर के अकाउंट्स का विवरण दे सकती है, लेकिन उसके लिए इस बात के पर्याप्त सबूत देने होंगे कि अकाउंट की जानकारी देने से खतरे को टाला जा सकता है। 


आपात स्थिति वाले 150 अनुरोध भारत से मिले, केवल एक फीसदी मामलों पर कार्रवाई

आपात स्थिति के अनुरोध वाले ऐसे केवल 150 अनुरोध ही भारत को ट्विटर से मिले। जबकि इसी अवधि में अमेरिका ने ऐसे 822 अनुरोध भेजे। कंपनी के मुताबिक, आपात स्थिति के मामले में अमेरिका का यह अनुरोध दुनिया में सबसे ज्यादा था। ट्विटर ने भारत सरकार के अनुरोध पर केवल एक फीसदी मामले में, जबकि अमेरिका के 22 फीसदी मामलों पर ट्विटर ने कार्रवाई की।


पत्रकारों और समाचार सामग्री के संबंध में अकेले भारत से मिले 128 अनुरोध

कंपनी के अनुसार, दुनियाभर में सत्यापित पत्रकारों और समाचार देने वालों के 199 अकाउंट्स के संबंध में सूचना देने के लिए जुलाई-दिसंबर 2020 के दौरान कुल 361 अनुरोध मिले थे। इनमें से 128 अनुरोध अकेले भारत से आए हैं।
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भारत से ट्विटर के रिश्ते खराब

2021 के पहले छह महीने की रिपोर्ट आना बाकी है। इन छह महीनों के दौरान ट्विटर और भारत सरकार के बीच सूचना प्रौद्योगिकी के सख्त नियमों को लेकर तनावपूर्ण स्थिति रही है। किसान आंदोलन के दौरान फरवरी में कंपनी सरकार के साथ उन अकाउंट्स को लेकर भिड़ गई थी, जिन्हें सरकार किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हटाना चाहती थी। ट्विटर ने कुछ अनुरोधों को माना, लेकिन पत्रकारों, कार्यकर्ताओं या राजनेताओं के अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर दिया।


इस झगड़े के हफ्तों बाद भारत ने नए नियम पेश किए, जिसमें अन्य बातों के अलावा सोशल मीडिया कंपनियों को देश में तीन भूमिकाओं के लिए अधिकारियों की नियुक्ति करने को कहा। जिसमें एक अनुपालन अधिकारी, एक शिकायत अधिकारी और एक संपर्क व्यक्ति शामिल है। ट्विटर को हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने नए नियमों को समय पर नहीं मानने के कारण फटकार लगाई थी। इसके बाद कंपनी ने अंतरिम अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति की।

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