एक अधिकारी ने बताया कि सौर पैनल लगाने में जगह की कमी सबसे बड़ी बाधा होती है। उन्होंने बताया कि इस सौर वृक्ष की खासियत यह है कि यह बहुत कम जगह लेता है और इसे इमारत के पास कहीं भी लगाया जा सकता है।
ओडिशा के गंजाम जिले स्थित ब्रह्मपुर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के छात्रों ने एक सौर वृक्ष (सोलर ट्री) विकसित कर इसे अपने परिसर में स्थापित किया है।
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एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि सौर पैनल लगाने में जगह की कमी सबसे बड़ी बाधा होती है। उन्होंने बताया कि इस सौर वृक्ष की खासियत यह है कि यह बहुत कम जगह लेता है और इसे इमारत के पास कहीं भी लगाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि यह ढांचा धातु से बना है और इसे वृक्ष की तरह बनाया गया है। अधिकारी ने बताया कि वृक्ष की धातु से बनी शाखाओं से जुड़े सौर पैनल सूरज की रोशनी की मदद से ऊर्जा उत्पादन करते हैं। उन्होंने बताया कि दो किलोवाट की प्रणाली का परीक्षण हाल ही में शुरू हुआ है।
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आईटीआई ब्रह्मपुर के प्राचार्य रजत पाणिग्रही ने बताया, ‘‘वृक्ष को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि प्रत्येक सौर पैनल को सूरज की पूरी-पूरी रोशनी मिलती रहे।’’
सूत्रों ने बताया कि इसमें 12 सोलर पैनल लगे हैं, जिसकी ऊंचाई 12 फीट है। सूत्रों ने बताया कि इसे विकसित करने में करीब दो लाख रुपये खर्च हुए हैं। पाणिग्रही ने दावा किया, ‘‘सौर वृक्ष की अवधारणा नई नहीं है, लेकिन आईटीआई ब्रह्मपुर ने इसे राज्य में पहली बार बनाया है।’’ उन्होंने बताया कि शिक्षण स्टाफ के मार्गदर्शन में प्रायोगिक आधार पर सौर वृक्ष को विकसित करने में छात्रों को लगभग पांच दिन लगे।
बता दें कि इससे पहले, सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएसआईआर) ने दुनिया का सबसे बड़ा सोलर ट्री विकसित किया था, जिसे पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एक आवासीय कॉलोनी में स्थापित किया गया है।