राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में दो दिवसीय शिविर और खुली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में संवेदनशील बनने की सलाह दी। आयोग ने चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी और अन्य अधिकारियों से पुराने निर्देशों पर उठाए गए कदमों की रिपोर्ट भी मांगी है।
इस दो दिवसीय शिविर में आयोग ने 144 मामलों की सुनवाई की और करीब 28 लाख रुपये की अंतरिम राहत की सिफारिश की। इसमें एक आदिवासी महिला को पेंशन और ₹15,000 की राहत, और एक खतरनाक पटाखा फैक्ट्री में काम के दौरान मारे गए पांच मजदूरों के परिवारों को चार लाख रुपए की सहायता राशि देने का निर्देश शामिल था।
पुलिस उत्पीड़न जैसे मुद्दों पर चर्चा
एनएचआरसी की सुनवाई में हिरासत में मौत, अस्पताल में आग से बच्चों की मौत, रेप, महिला हिंसा, बच्चों का लापता होना, बाल तस्करी, पुलिस उत्पीड़न, एफआईआर दर्ज न करना, बिजली करंट से मौत जैसी कई गंभीर घटनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। आयोग ने संबंधित मामलों में पुलिस जांच में तेजी लाने और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया। आयोग ने 38 मामलों को सुनवाई के बाद बंद कर दिया जबकि तीन मामलों को उस समय बंद किया गया जब अधिकारियों ने आयोग की सिफारिश के अनुसार रिपोर्ट और भुगतान का प्रमाण प्रस्तुत किया।
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एक करोड़ रुपये मुआवजा लंबित
एनएचआरसी ने यह भी उल्लेख किया कि 'पीड़ित मुआवजा योजना' के तहत 25 मामलों में एक करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। ओडिशा स्टेट लीगल सर्विसेस के सदस्य सचिव ने आश्वासन दिया कि मुआवजा भुगतान के बाद इन मामलों का शीघ्र निपटारा किया जाएगा।
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ओडिशा सरकार से विस्तृत चर्चा
सुनवाई के बाद आयोग ने राज्य के चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों जैसे महिला-बच्चों पर अपराध, सांप के काटने से मौत, कोविड के दौरान मानव तस्करी, बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, और ओझा-तांत्रिक प्रथा के चलते मानवाधिकार हनन पर चर्चा की। आयोग ने राज्य के अधिकारियों द्वारा अपने निर्देशों के पालन पर संतोष जताया।