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Odisha: वन विभाग के तीन कर्मचारी गिरफ्तार, अवैध हाथी शिकार मामले के चश्मदीद की हत्या करने का आरोप

Fri, 17 Feb 2023 03:13 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारिपदा

सार

आरोपियों द्वारा जहर दिए जाने के बाद चश्मदीद की पिछले साल 15 दिसंबर को कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज एवंं अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस संबंध में मृतक की पत्नी ने मयूरभंज जिले के जोशीपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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ओडिशा पुलिस ने सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में काम करने वाले वन विभाग के तीन कर्मचारियों को हाथी के अवैध शिकार मामले में एक चश्मदीद की कथित तौर पर हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। एक पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि आरोपियों पर सबूत नष्ट करने के लिए चश्मदीद को जहर देने का आरोप लगाया गया है। 

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आरोपियों द्वारा जहर दिए जाने के बाद चश्मदीद की पिछले साल 15 दिसंबर को कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज एवंं अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस संबंध में मृतक की पत्नी ने मयूरभंज जिले के जोशीपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। एसडीपीओ (करंजिया) सुदर्शन गंगोई ने कहा कि तीनों को आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

हाईकोर्ट ने बाल अधिकार निकाय में रिक्तियों पर जताई चिंता
वहीं, उड़ीसा हाईकोर्ट ने गुरुवार को ओडिशा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (OSCPCR) में रिक्तियों पर चिंता जताई। हाईकोर्ट ने कहा कि रिक्तियों को नहीं भरने से वह उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा, जिसके लिए आयोग का गठन किया है। इस मुद्दे पर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एस मुरलीधर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सरकारी वकील से इसके जवाब में राज्य सरकार से निर्देश लेने को कहा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख नौ मार्च तय की है।
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याचिका में कहा गया है कि बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के तहत एक अध्यक्ष और छह अन्य सदस्य होने चाहिए। दुर्भाग्य से, आयोग पिछले साल अगस्त से सिर्फ अध्यक्ष के साथ काम कर रहा है। याचिकाकर्ता कुमार दास ने कहा कि यह गंभीर सार्वजनिक चिंता का विषय है कि राज्य सरकार रिक्तियों को भरने में विफल रही, जबकि ऐसी रिक्तियों को 180 दिनों के भीतर ही भरा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2022 तक बाल अधिकारों से संबंधित 2,372 मामले आयोग के समक्ष लंबित थे।
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