दलित परिवार से संबंध रखने वाले जेना मजदूरी कर परिवार का पेट पालते हैं। जेना के परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटियां हैं। उनका कहना है कि दोबारा घर बनाने के लिए उसके पास कोई संसाधन भी नहीं है।
जेना की पूरी उम्मीद चक्रवात बहाली अनुदान से मिलने वाले पैसे पर टिकी हुई हैं। जेना ने बताया, 'जब तक तूफान बहाली अनुदान मुझे नहीं मिल जाता तब तक यह शौचालय ही मेरा घर रहेगा। यहां रहने की वजह से हमें शौच के लिए बाहर ही जाना पड़ता है।'
उसने कहा, 'मैंने प्रधानमंत्री आवास योजना और बीजू पक्का घर योजना के तहत आवास के लिए आवेदन किया था, लेकिन मेरा आवेदन निरस्त कर दिया गया। यदि सरकार की मदद से मेरा कच्चा घर पक्का हो गया होता तो शायद तूफान की तबाही से हम बच जाते।'
जिला ग्रामीण विकास एजेंसी के प्रोजेक्ट निदेशक दिलीप कुमार परीदा कहते हैं, 'यह हमारे संज्ञान में आया है कि देराबिश ब्लॉक में एक परिवार शौचालय में रह रहा है। परिवार के लिए अलग आवास अनुदान के अलावा चक्रवात क्षति अनुदान दिया जा रहा है।'