ओडिशा सरकार ने कोरोना का टीका नहीं लेने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को चेतावनी दी है। सरकार ने कहा है कि टीका लेने के लिए अनिच्छुक कर्मचारियों को टीकाकरण अभियान का अनुपालन नहीं करने पर उनके विशेषाधिकार खत्म कर दिए जाएंगे।
90000 कर्मचारियों ने टीक लेने से किया मना
ओडिशा में कोरोना टीकाकरण के लिए 5.43 लाख स्वास्थ्य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स ने पंजीकरण कराया है जिसमें से अब तक लगभग 90,000 स्वास्थ्य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स ने कोरोना का टीका नहीं लिया है। टीकाकरण में कमी को देखते हुए ओडिशा सरकार ने मंगलवार को चेतावनी दी है कि जो लोग बिना किसी वास्तविक आधार के टीकाकरण के लिए मना कर रहे हैं, उनके विशेषाधिकार अब खत्म कर दिए जाएंगे।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके महापात्रा द्वारा सभी कलेक्टरों और जिलाधिकारियों और भुवनेश्वर, कटक, बेरहामपुर, संबलपुर के आयुक्तों और राउरकेला नगर निगम को लिखे पत्र में कहा गया है कि बार-बार दिए गए निर्देशों और अवसरों के बावजूद, कुछ पंजीकृत स्वास्थ्य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स ने कोविड-19 वैक्सीन की पहली खुराक नहीं ली है।
कोरोना टीकाकरण में ओडिशा तीसरे स्थान पर
महापात्रा ने कहा कि '85 फीसदी से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों का टीकाकरण किया गया है और फ्रंटलाइन वर्कर्स का टीकाकरण भी अच्छे कवरेज के साथ चल रहा है। ओडिशा राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य कर्मचारियों (एचसीडब्ल्यू) और फ्रंटलाइन वर्कर्स (एफएलडब्ल्यू) के कोविड -19 टीकाकरण के संदर्भ में तीसरे स्थान पर है।
स्वास्थ्य कर्मचारियों को मिलने वाले विशेषाधिकार खत्म कर दिए जाएंगे
उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स टीकाकरण के लिए पंजीकृत किए गए हैं, लेकिन अब कुछ लोग बिना किसी वास्तविक आधार (गर्भनिरोधक संकेत की स्थिति) के टीकाकरण के लिए मना कर रहे हैं, इसलिए अब से उनके कोविड-19 के मामले में सरकार द्वारा दिए गए विशेषाधिकारों को खत्म कर दिया जाएगा।
विशेषाधिकार के तहत कर्मचारियों को कोरोना संक्रमित होने पर नि:शुल्क उपचार, आइसोलेशन या उपचार की अवधि को ड्यूटी के रूप में गिना जाना, कोरोना से मृत्यु होने पर दिए जाने वाले वित्तीय और अन्य लाभ शामिल हैं।
ओडिशा सरकार ने दावा किया है कि भारत सरकार की ओर से कोविड -19 वैक्सीन की खुराक टीकाकरण के लिए पंजीकृत स्वास्थ्य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स की संख्या के अनुसार दिए गए हैं। यदि आवंटित टीकों का पूरी तरह से उपयोग नहीं किया जाता है, तो राज्य कोरोना महामारी से लड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर से चूक जाएगा। इसके साथ ही, कोरोना का टीका नहीं लेने वाले स्वास्थ्य कर्मचारी और फ्रंटलाइन वर्कर्स अपने समुदाय और कार्यस्थल दोनों को कोविड-19 संचरण के जोखिम में डालेंगे।
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि जिलाधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने के लिए कहा गया है कि सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को कोविड-19 का टीका केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा दिए गए समय के भीतर लग जाना चाहिए।
महाराष्ट्र-केरल में बढ़ते कोरोना मामलों से सतर्क हुआ ओडिशा
केरल और महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए ओडिशा सरकार सतर्क हो गई है। ओडिशा में फिर से कोरोना के मामले नहीं बढ़े इसके लिए सरकार ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जिनका लोगों को पालन करना होगा। विशेष राहत आयुक्त कार्यालय की तरफ से बताया गया है कि उनकी तरफ से किन बातों का ध्यान रखा जा रहा है और लोगों को किन बातों का ध्यान रखना है।
सभी मार्केट्स, हॉट्स और अन्य स्थानों में लाउडस्पीकर से लोगों को जागरूक करने का काम लगाातार जारी है। किसी में भी कोरोना के लक्षण हो तों उसे तुरंत पास के स्वास्थ्य विभाग जाना है। इसके साथ-साथ बेसिक प्रोटोकॉल जैसे सार्वजनिक जगहों पर मास्क का इस्तेमाल, बार-बार हाथ धोने की आदत और सैनिटाइजर का इस्तेमाल बंद नहीं करना है। इसके साथ ही आपस में एक मीटर की दूरी बनाने के भी निर्देश दिए गए हैं।