ओडिशा के मुख्यमंत्री निज सचिव ने सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि पूर्व अफसर बीजद में शामिल हो सकते हैं। उम्मीद है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है।
केंद्रीय विभाग ने किया स्वीकार की सेवानिवृत्ति
जानकारी के अनुसार, वीके पांडियन 2000 बैच के आईएएस अफसर थे। मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी होने के कारण पांडियन राज्य में काफी ताकतवर हो गए थे, जिस वजह से वे अक्सर विवादों से घिर जाते थे। विपक्ष का आरोप है कि वह राजनीतिक लाभ के लिए अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने ओडिशा सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर बताया कि उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को स्वीकार कर लिया गया है।
ऐसा है उनका करियर
2000 बैच के पांडियन ने अपने करियर की शुरुआत 2002 में कालाहांडी जिले के धर्मगढ़ के उप-कलेक्टर के रूप में की थी। 2005 में उन्हें मयूरभंज जिले का कलेक्टर नियुक्त किया गया। 2007 में उन्हें गंजम का कलेक्टर बनाया गया। गंजम में नियुक्ति के दौरान ही वे मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबी बन गए। बता दें, पटनायक मूल रूप से गंजम जिले के रहने वाले हैं। साल 2011 में पांडियन मुख्यमंत्री में शामिल हुए और तब से वह पटनायक के निजी सचिव हैं।
भाजपा-कांग्रेस ने किया विरोध
2019 में पांडियन को सरकारी विभागों में नए पहल लागू करने के लिए 5T सचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। भाजपा और कांग्रेस ने इस कारण विरोध किया था और कहा था कि वह पद से इस्तीफा दे दें और आधिकारिक रूप से बीजद में शामिल हो जाएं। इस दौरान पांडियन राज्य भर में ढेरों दौरे किए और जनता की शिकायत सुनने के लिए ताबड़तोड़ 190 बैठकें कीं। कांग्रेस सांसद सप्तगिरी उलाका ने कहा कि पांडियन अगर अगले चुनाव से पहले ओडिशा के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभाल संभालते हैं तो उन्हें आश्चर्य नहीं होगा। इसके अलावा, भाजपा के मुख्य सचेतक मोहन माझी ने कहा कि राजनीतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए पांडियन ने इस्तीफा दे दिया है। अब वे खुलकर राजनीति कर सकेंगे।