ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को दिसंबर में हुई बेमौसम बारिश को 'प्राकृतिक आपदा' घोषित किया, ताकि किसानों को फसल के नुकसान के लिए राज्य के आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) से मुआवजा प्रदान किया जा सके।'कृषि ओडिशा कनक्लेव-2025' को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि जिन किसानों को दिसंबर में हुई बेमौसम बारिश के कारण अपनी फसल का 33 फीसदी या उससे अधिक नुकसान हुआ, उन्हें राहत कोष से मदद दी जाएगी।
माझी ने कहा, इस बार की बेमौसम बारिश राज्य की प्राकृतिक आपदा की सूची में नहीं थी। लेकिन किसानों की फसल के नुकसान और उनकी स्थिति को देखते हुए हमारी सरकार ने आज इसे प्राकृतिक आपदा के रूप में घोषित किया, ताकि एसडीआरएफ से मुआवजा दिया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि 6,66,720 किसानों ने 20 से 28 दिसंबर के बीच की बारिश से 33 फीसदी या उससे अधिक फसल के नुकसान होने का दावा किया है। इन किसानों को करीब 291 करोड़ का मुआवजा दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, करीब 2,26,791 हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसलें इस बेमौसम बारिश से प्रभावित हुईं। माझी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार सब्जी उत्पादकों और सुपारी व कपास जैसी अन्य नकदी फसलें उगाने वाले किसानों को भी सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा, हमारी सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कदम उठा रही है। राज्य सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया था कि धान की खरीद 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी। इसके साध ही 800 रुपये की इनपुट (बीज, उर्वरक, पानी, कीटनाशक, कृषि यंत्र आदि के लिए) सहायता भी प्रदान की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि ओडिशा सरकार ने 'मुख्यमंत्री किसान योजना' शुरू की है, जिसके तहत करीब 46 लाख किसानों को 925 करोड़ रुपये से अधिक की मदद दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा, इन उपायों से साबित होता है कि हमारी सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। ओडिशा सरकार बारिश से प्रभावित किसानों को अतिरिक्त मदद देने के अलावा, सिंचाई, कोल्ड स्टोरेज, मॉडल बाजार, गोदाम और कृषि मशीनरी के लिए भी व्यवस्था करेगी।
माझी ने कहा, किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद के लिए सब्सिडी और विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। यह जनता की सरकार कृषि और किसानों के समग्र विकास को महत्व देती है। हमारी सरकार कृषि क्षेत्र के विकास को तेजी से बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।