नर्सों की परेशानी देखकर नर्सेज फेडरेशन ने पांच विशेष कैटेगरी की नर्सों को कोविड ड्यूटी से हटाकर दूसरी जगहों पर लगाने की मांग है जिससे वे अपनी सुरक्षा के साथ-साथ अपनी ड्यूटी भी कर सकें।
इनमें गर्भवती नर्सें, बच्चों को दूध पिला रही नर्सें, माता-पिता दोनों के नर्स होने या दोनों में से एक पुलिस की ड्यूटी में काम कर रही नर्सों के लिए अलग सुविधा की मांग की है। इसके लिए केंद्रीय और प्रदेश स्तर के मंत्रियों और सचिव स्तर के अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
नर्सों को एक जनवरी के 30 जून के बीच 15 विशेष छुट्टी अर्जित अवकाश (Earned Leave) दी जाती हैं। इस दौरान इन छुट्टियों को न लेने पर वे रद्द् हो जाती हैं। कोरोना काल में सभी स्वास्थ्यकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।
ऐसे में नर्सें इन छुट्टियों का उपयोग नहीं कर पा रही हैं। नर्सों की मांग है कि इन छुट्टियों को आगे के लिए बढ़ा दिया जाए जिससे कोरोना काल के पश्चात वे अपनी इस सुविधा का लाभ ले सकें।
एक अनुमान के मुताबिक इस समय दिल्ली में हजारों नर्सें दिन-रात लोगों की सेवा में जुटी हुई हैं। इसमें दिल्ली सरकार के अस्पतालों में 10 हजार, एम्स में पांच हजार, अन्य केंद्रीय अस्पतालों में लगभग 6 हजार, तीनों नगर निगम के अस्पतालों में 3000, ईएसआईसी अस्पतालों में 800 और सुरक्षा बलों के विशेष अस्पतालों में हजारों नर्सें काम करती हैं।
इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में भी लगभग पांच हजार नर्सें लोगों की सेवा कर रही हैं।
केंद्र सरकार की जानकारी के मुताबिक इस समय पूरे भारत में 17,48,363 नर्सों को कोरोना वॉरियर्स के रूप में रजिस्टर किया गया है। इसके अलावा 10,07,045 आशा कार्यकर्ता भी इसी काल में लोगों की सेवा में जुटी हैं। अगर दिल्ली की बात करें तो यहां 43,865 नर्सें और 5,817 आशा कार्यकर्ता इस समय अपनी सेवाएं दे रही हैं।