स्मार्टफोन उपभोग के मामले में ग्रामीण क्षेत्रों ने शहरों को भी पछाड़ दिया है। सेलुलर इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेट और स्मार्टफोन के उपभोग के मामले मेें 2018 तक ग्रामीण क्षेत्रों में 35 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह वृद्धि केवल सात फीसदी के करीब ही रही है। ग्रामीण लोग भी मोबाइल सेवाओं पर अपने बजट का लगभग 25 प्रतिशत धन खर्च कर रहे हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में भी यह आंकड़ा 26 प्रतिशत के आसपास ही है।
भारतीय ग्राहक इंटरनेट सेवाओं का उपयोग सबसे ज्यादा स्मार्टफोन के जरिए ही कर रहे हैं। कुल इंटरनेट सेवाओं के उपभोक्ताओं में स्मार्टफोन से इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 38 प्रतिशत से ज्यादा है। अनुमान है कि स्मार्टफोन धारकों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ इंटरनेट आधारित सेवाओं के ग्राहकों की संख्या भी बढ़ेगी और इसके साथ ही साइबर अपराध की घटनाओं में भी वृद्धि होगी।
ऐसे बढ़ रहे हैं अपराध
एनसीआरबी 2019 की रिपोर्ट से संकेत मिलते हैं कि स्मार्टफोन के उपभोग के साथ-साथ साइबर अपराधों के मामलों में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 की तुलना में 2019 में शहरी क्षेत्रों में साइबर अपराध की घटनाओं में 82 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। 2018 में साइबर अपराध की कुल 18,732 घटनाएं ही दर्ज की गई थीं, जो 2019 में बढ़कर 44546 हो गईंं। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि साइबर अपराध की कुल घटनाओं में 60 प्रतिशत तक का उद्देश्य फ्रॉड करना पाया गया है।
साइबर कानून विशेषज्ञ एडवोकेट दर्शन कहते हैं कि अन्य अपराधों की तुलना में साइबर फ्रॉड के अपराधियों को पकड़ना इस अर्थ में बेहद मुश्किल है क्योंकि ये अपराध सुदूर क्षेत्रों से लेकर देश की सीमाओं से परे रहकर भी अंजाम दिए जाते हैं। इन जगहों पर तकनीकी-कानूनी अड़चनों की वजह से सुरक्षा एजेंसियों और सरकारों की भी पहुंच आसान नहीं होती।
वहीं, देश के अंदर होने वाले साइबर अपराधों को रोकना बहुत मुश्किल नहीं है। इंटरनेट आधारित सभी सेवाओं को लेने के लिए आधार जैसी आईडी का उपयोग अनिवार्य करके और किसी भी प्लेटफॉर्म पर फर्जी एकाउंट बनाने पर रोक लगाकर साइबर अपराधियों पर लगाम लगाई जा सकती है। इसके लिए हर बड़ी सेवाओं के लिए उनको भारत में स्टेशन बनाना अनिवार्य किया जाना चाहिए।
साइबर कानून की धाराओं को भी सख्त बनाया जाना चाहिए। अमेरिकी-यूरोपीय देश पहले ही अपने कानूनों को सख्त बना चुके हैं। यहां कई साइबर अपराध के मामलों में उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है जबकि भारत में अभी ऐसे कठोर कानूनों का अभाव है।