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गंगा के निर्मलीकरण की योजनाओं पर बाधा बनें शहरों से निकलते नाले

Fri, 06 Jan 2017 05:37 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, कानपुर/वाराणसी/इलाहाबाद
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ganga
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गंगा से प्रदूषण दूर करने को लेकर केंद्र और प्रदेश की सरकारें भले ही कई योजनाएं चला रही हों लेकिन नतीजा कुछ निकलता दिख नहीं रहा है। हरिद्वार से कानपुर तक गंगा में गिरने वाले 300 से अधिक नालों को रोकने और सीवरेज ट्रीटमेंट सिस्टम को अपडेट करने संबंधी कई योजनाएं केवल कागजों पर ही हैं।
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नतीजतन हरिद्वार से ही गंगा में गंदे नाले मिलने शुरू होते हैं और वाराणसी तक आते-आते स्थितियां बद से बदतर होती चली जाती हैं। कानपुर में 24 नालों का गंदा पानी गंगा में मिल रहा है। काशी में जहां पहले 23 नाले सीधे गंगा में गिरते थे उनकी संख्या अब बढ़कर 49 हो गई है।

केंद्र सरकार द्वारा कानपुर में गंगा से प्रदूषण दूर करने और घाटों को विकसित करने के लिए 600 करोड़ की योजना तैयार की गई थी। शुरुआत घाटों के सुंदरीकरण से होना था लेकिन यह काम भी अब ठप पड़ा है।
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टेनरियों से निकलने वाले कचरे के कारण गंगा में हानिकारक तत्वों की मात्रा तीन गुने से भी ज्यादा पाई गई है। उल्लेखनीय है कि टेनरियों के कचरे को उपचारित करने के लिए कानपुर में बड़ी क्षमता वाला ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की घोषणा हुई थी। यह कार्य भी घोषणा तक ही सिमट कर रह गया। गंगा किनारे स्थापित टेनरियों को जेडएलडी (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज) सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया। 
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किसी पर नहीं हुई कार्रवाई

- फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार ने इसके लिए 700 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की। सरकार ने कहा कि जो लोग इसका पालन नहीं करेंगे, उन पर सख्त कार्रवाई होगी। बावजूद इसके न तो किसी पर कार्रवाई हुई न ही जेडएलडी लगाया गया।

यही नहीं मेरठ, बुलंदशहर, फर्रूखाबाद, अलीगढ़ होते हुए काली नदी के साथ आने वाले कचरे ने गंगा की स्थिति और बदहाल कर दी है। बाद में केंद्र सरकार ने कहा कि गंगा की सुरक्षा का बीड़ा अब उसके किनारे रहने वाले लोग ही उठाएंगे। प्रदेश से लेकर ग्रामीण स्तर तक गंगा समितियों का गठन किया जाएगा। समितियां गंगा के किनारे पौधे लगाएंगी और घाटों को सुंदर बनाएंगी। फिलहाल यह कमेटियां औपचारिक होकर रह गई हैं।

कानपुर में गंगा में घाटों के आसपास पर कचरे की सफाई करने के लिए कें द्र सरकार ने स्किमर मशीन मंगाई थी, जो कुछ दिनों के बाद ही वापस हो गईं। काशी में गंगा निर्मलीकरण के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सीवेज पंपिंग स्टेशन, कूड़ा निस्तारण और नालों को बंद करने के नाम पर दो हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं लेकिन नतीजा शून्य दिख रहा है। इलाहाबाद में सैकड़ों करोड़ की योजनाओं में से कुछ का काम पूरा हो चुका है कुछ का साल 2018 तक पूरा होना है। बावजूद इसके शहर में राजापुर, मेहंदौरी, शिवकुटी, सलोरी से भारी मात्रा में गंदा पानी सीधे गंगा में जा रहा है। 
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