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Nuh violence: पता था माहौल का...फिर भी बहकावे में आकर आ गए यात्रा में और खो दिया अपना जिगरी दोस्त

सार

Nuh violence: अमर उजाला से बात करते हुए पानीपत के नूरवाला गांव के अनमोल कहते हैं कि उन्हें पता था कि हालात इस यात्रा के दौरान बिगड़ सकते हैं। वह अपने दोस्तों के साथ वहां न जाने की बात भी कर रहे थे। लेकिन उनके साथ कुछ लोग ऐसे भी थे, जो बीते दो साल से इस यात्रा में शामिल होते रहे थे...
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Nuh violence - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
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विस्तार
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पानीपत में नूरवाला गांव के अनमोल कहते हैं कि नूंह में होने वाली यात्रा को लेकर पहले से ही तनाव बढ़ाया जा रहा था। उन लोगों के मोबाइल पर यात्रा को लेकर तरह तरह के वीडियोज और 'मैसेजेज' आ रहे थे। बावजूद इसके वह अपने दोस्तों के साथ इस यात्रा में शामिल होने चले गए। वह कहते हैं कि अपने दोस्तों के उकसावे में आने पर उन्होंने अपने जिगरी दोस्त को भी इस दुनिया से खो दिया। उनका दोस्त अभिषेक इस दंगे में मारा गया। अनमोल रोते हुए कहते हैं कि वह इससे पहले कभी इस यात्रा में शामिल नहीं हुए थे। अमर उजाला डॉट कॉम ने इस यात्रा में शामिल और भी कई लोगों से बात की, तो पता चला कि कोई अपने दोस्तों के बहकावे में इस यात्रा में शामिल हुआ, तो कोई मोनू मानेसर के जारी वीडियो के बाद यात्रा में शामिल हुआ।

अमर उजाला से बात करते हुए पानीपत के नूरवाला गांव के अनमोल कहते हैं कि उन्हें पता था कि हालात इस यात्रा के दौरान बिगड़ सकते हैं। वह अपने दोस्तों के साथ वहां न जाने की बात भी कर रहे थे। लेकिन उनके साथ कुछ लोग ऐसे भी थे, जो बीते दो साल से इस यात्रा में शामिल होते रहे थे। अनमोल कहते हैं कि वह अपने इन दोस्तों के बहकावे में आकर नूंह में आयोजित कार्यक्रम में अपने कई दोस्तों के साथ चले गए। इन्हीं दोस्तों के साथ में उनका एक दोस्त अभिषेक चौहान भी था। वह कहते हैं कि जब कार्यक्रम के दौरान हालात बिगड़ने लगे, तो वहां सभी लोग इधर-उधर भागने लगे। इतने में उसके दोस्त अभिषेक चौहान को एक गोली लगी और फिर उसके बाद जो हुआ वह पूरी जिंदगी कभी ना भूलने वाला दर्द था। अनमोल कहते हैं कि इस हिंसा में उनका दोस्त मार दिया गया। रोते-बिलखते सभी लोग इधर-उधर भागते रहे। जैसे-तैसे उनको कहीं शरण मिली लेकिन वह अपने दोस्त को हिंसा में नहीं बचा सके। फोन पर रोते हुए अनमोल ने कहा कि इस यात्रा में अपने दोस्तों के साथ शामिल होना उनकी अब तक की सबसे बड़ी भूल थी। क्योंकि उनको पता था कि यहां पर हालात ठीक नहीं हैं। फिर भी वह दोस्तों के बहकावे में आकर नूंह चले आए।

इसी तरह फरीदाबाद के सीकरी में रहने वाले योगेश कहते हैं कि वह तो प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। उनके मोहल्ले में रहने वाले  प्रवीण यादव और तीन अन्य दोस्तों के साथ इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गए हुए थे। वह कहते हैं उनका दोस्त प्रवीण यादव रियल इस्टेट से जुड़ा कारोबार करता है। इसलिए उसके साथ आसपास के इलाके के कई और व्यापारी दोस्तों के साथ वह इसमें चले गए थे। उनको इस बात की बिल्कुल जानकारी नहीं थी कि वहां पर जो हालात होने वाले हैं, वह इतने बिगड़ जाएंगे। वह बताते हैं कि जैसे ही वह इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे, तो वहां पर हो रही नारेबाजी और लग रहे नारों से लगा कि कहीं कार्यक्रम के शुरू होने पर स्थितियां बिगड़ने न लगें। उनका कहना है वह इस कार्यक्रम में इतना पीछे थे कि जैसे ही पता चला की यात्रा शुरू होने पर स्थितियां बिगड़ने लगी हैं, तो वह सबसे पहले वहां से निकल आए। उन्होंने घर पहुंच कर टीवी और मोबाइल के माध्यम से इतनी भीषण हिंसा की जानकारी मिली। उनका कहना है कि अगर यह पता होता कि हालात ऐसे होंगे, तो वह शायद इसमें शामिल ही न होते।

फरीदाबाद के तापड़ी में रहने वाले अभिषेक यादव कहते हैं कि उनके घर वालों ने इस यात्रा में शामिल होने के लिए मना भी किया था। लेकिन वह अपने दोस्तों के साथ इस कार्यक्रम में शामिल तो होने पहुंच गए। लेकिन उनको अपनी गलती का एहसास तब हुआ जब वहां के हालात को उन्होंने देखा। वह कहते हैं कि बीते दो सालों से इस यात्रा में शामिल होते आए थे। लेकिन उनको इस साल की यात्रा में होने वाले हिंसा का बिल्कुल एहसास नहीं था। वह कहते हैं अगर उनको पता होता कि इस यात्रा में इतनी हिंसा होगी, तो वह कभी भी शामिल नहीं होते। उनका कहना है कि उनके कई दोस्त मुस्लिम भी हैं। वह तो सिर्फ आस्था के चलते इस कार्यक्रम में शरीक होने आए थे। लेकिन शायद जिस तरीके का पहले से सोशल मीडिया में माहौल बनाया गया था, शायद उसी डर के चलते उनके घर वालों ने इस यात्रा में शामिल न होने के लिए कहा था।

इस कार्यक्रम में शामिल ज्यादातर लोग मोनू मानेसर और तमाम अन्य लोगों के उकसावे वाले वीडियो और बयानों के चलते शामिल हुए थे। इस मामले की जांच कर रहे अधिकारियों द्वारा यह जानने कोशिश की जा रही है कि वह कौन-कौन से सोशल मीडिया के ग्रुप और मोबाइल नंबर हैं, जिनके माध्यम से सबसे ज्यादा वीडियो को और यात्रा से पहले भड़काऊ भाषणों को आगे बढ़ाया गया है। जांच करने वाले महकमे से जुड़े लोगों ने बताया कि पकड़े गए लोगों से की गई पूछताछ में ज्यादातर यही बता रहे थे कि वह इस यात्रा में अपने दोस्तों के साथ पहुंचे थे। फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस यही जानने की कोशिश कर रही है कि कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों के बीच में हथियार कैसे पहुंच गए थे। हरियाणा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि यात्रा में किसी भी तरीके के हथियार के होने का मतलब यही होता है कि माहौल को पहले से ही बिगाड़ा गया हो।

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