एनटीए सीबीएसई (केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) द्वारा मेडिकल, फार्मेसी, इंजीनियरिंग, प्रबंधन के क्षेत्र में ली जाने वाली सभी राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं को संचालित करेगा।
यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा ली जाने वाली यूजीसी-नेट परीक्षा का भी आयोजन करेगी। फिलहाल एनटीए खुद को 2019 के लिए एनटीए-2019, नीट-2019, जेईई-2019, गेट-2019, जीएमएटी, जीपीएटी-2019, यूजीसी-नेट-2019, सीटीईटी-2019 की परीक्षा को पूरी मुश्तैदी से कराने की तैयारी कर रहा है।
एक अनुमान के मुताबिक इन परीक्षाओं में 50 लाख से अधिक छात्रों के बैठने की उम्मीद है। परीक्षाओं के ऑनलाइन होने की प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है।
कब से आया एनटीए अस्तित्व में
नवंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्ष में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक ने एनटीए के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। एनडीए के गठन का सुझाव भी प्रधानमंत्री की तरफ से ही आया था। इसके बाद 30 मार्च 2018 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मणिपुर कॉडर के आईएएस अधिकारी विनीत जोशी को पांच साल के लिए इसका महानिदेशक नियुक्त कर दिया।
सात जुलाई 2018 को मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने एनटीए के पूरी तरह से परीक्षा के लिए तैयार होने की घोषणा कर दी है। इसी के साथ एनटीए ने परीक्षा की तिथियों की घोषणा करनी शुरू कर दी है।
पिछले साल सीबीएसई की परीक्षा में पेपर लीक से सरकार के माथे पर आए बल ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की परिकल्पना को जन्म दिया है।
केन्द्र सरकार ने नवंबर 2017 में ही इसे मंजूरी दी है। 30 मार्च 2018 को इसे इसका डीजी मिला है। डीजी ही इसका सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) होगा। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या इतने कम समय में एनटीए का कारगर तंत्र खड़ा हो चुका है?
दूसरा बड़ा सवाल यह है कि बोर्ड परीक्षा से पहले प्रतियोगी परीक्षा को संचालित करने पर क्या परीक्षार्थी इससे नहीं प्रभावित होंगे। एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक, देश के एक जाने माने शिक्षक को भी सरकार की यह जल्दबाजी समझ में कम आ रही है।
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर सूत्र का कहना है कि सरकार बहुत हड़बड़ी में है। मुझे परीक्षा के समय सबकुछ सुचारु रूप से न चल पाने का अंदेशा हो रहा है। हालांकि मानव संसाधन विकास मंत्री सरकार के इस कदम को न केवल क्रांतिकारी बता रहे हैं, बल्कि उन्हें इसकी एतिहासिक सफलता का भी भरोसा है।