जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगने के बाद आतंकवादियों के खिलाफ चौतरफा मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली गई है। ऑपरेशन ऑल आउट अभियान को सख्ती से आगे बढ़ाने के बीच अब सरकार ने नेशनल सिक्युरिटी गार्ड (एनएसजी) को राज्य में आतंकवाद निरोधक ग्रिड में शामिल करने का फैसला किया है।
एनएसजी विशेष परिस्थितियों में न सिर्फ आतंकवादियों से सीधा लोहा लेगा, बल्कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ-साथ सीआरपीएफ को सघन आबादी वाले क्षेत्रों में आतंकियों से मुकाबले के लिए प्रशिक्षित भी करेगा।
सूत्रों के मुताबिक आतंकवाद निरोधक ग्रिड में एनएसजी को शामिल करने का प्रस्ताव अरसे से लंबित था। जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार के कारण केंद्र सरकार इस पर अंतिम फैसला नहीं कर पा रही थी। मगर अब पीडीपी-भाजपा के सियासी तलाक के बाद सूबे में लगे राज्यपाल शासन के कारण केंद्र सरकार सियासी मजबूरियों के दबाव से बाहर आ गई है। गृह मंत्रालय ने एनएससी को न सिर्फ आतंकवाद निरोधक ग्रिड में शामिल करने की मंजूरी दी है, बल्कि जरूरत पडने पर आतंकी मुठभेड़ के दौरान मौके पर मोर्चा संभालने देने का भी फैसला किया है।
एनएसजी की भूमिका को बढ़ाते हुए गृह मंत्रालय ने इस विशेष ग्रुप को जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ को प्रशिक्षित करने की भी योजना तैयार की है।
एनएसजी खासतौर पर इन्हें घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का विशेष प्रशिक्षण देगा। दरअसल ऑपरेशन ऑल आउट के कारण 600 आतंकियों के साफाए के बाद घाटी में महज 200 आतंकी बचे हैं। केंद्र सरकार की योजना इन बचे आतंकियों को जल्द से जल्द ठिकाने लगाने की है।