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नगा शांति वार्ता को लेकर एनएससीएन-आईएम ने फिर साधा राज्यपाल पर निशाना

Sun, 16 Aug 2020 10:23 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
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आरएन रवि (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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एनएससीएन-आईएम ने रविवार को एक बार फिर नगालैंड के राज्यपाल और नगा शांति वार्ताकार आरएन रवि पर निशाना साधा। संगठन ने आरोप लगाया कि वह एक राजनीतिक मुद्दे को कानून व्यवस्था की समस्या बना रहे हैं और ऐसी नीति अपना रहे हैं जिसके चलते संगठन के सदस्य मारे गए और उन्हें गिरफ्तार किया गया।

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पिछले 23 साल से केंद्र के साथ शांति वार्ता में लगे एनएससीएन-आईएम ने एक बयान में यह आरोप भी लगाया कि रवि नगा लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं और केंद्र सरकार तथा तीन अगस्त, 2015 को हुए रूपरेखा समझौते पर संसद की स्थायी समिति को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।

बता दें कि नगा संगठन ने 11 अगस्त को भी राज्यपाल पर निशाना साधा था। एनएससीएन-आईएम ने अब कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है क्योंकि रवि द्वारा उनके पसंदीदा नगा संगठनों में बांटी गई प्रति में रूपरेखा समझौते की भावना ही नदारद है या हेरफेर कर अलग तरह का विचार प्रस्तुत किया गया है।
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क्या प्रधानमंत्री ने देश को गुमराह किया : कांग्रेस
वहीं, रवि की ओर से शांति समझौते को लेकर अपने रुख को सख्त करने पर कांग्रेस ने भी सवाल उठाए थे। इसे लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पूछा है कि क्या नगा समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को गुमराह किया है।

सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, 'पीएम मोदी द्वारा 2015 में किए नगा समझौते की चौंकाने वाली जानकारी उजागर। क्या पीएम 'साझा संप्रभुता' के लिए सहमत हैं? क्या पीएम ने 'ग्रेटर नगालिम' स्वीकार लिया? क्या पीएम ने अलग 'झंडा और संविधान' स्वीकार लिया? क्या पीएम ने राष्ट्र को 'गुमराह' किया?'

बता दें कि मोदी सरकार के साथ साल 2015 में नगा फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद पहली बार, एनएससीएन-आईएम के प्रमुख टी मुइवा ने कहा है कि नगा ध्वज और संविधान अपरक्राम्य (नॉन-नेगोशिएबल) हैं। इस रुख से शांति प्रक्रिया के पटरी से उतरने की संभावना है क्योंकि सरकार ने पहले एक अलग संविधान के विचार को खारिज करते हुए कहा था असम, अरुणाचल और मणिपुर को 'ग्रेटर नगालिम' में विभाजित नहीं किया जाएगा।

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