राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अमेरिका की यात्रा पर हैं। इस दौरान वह अपने समकक्ष जेक सुलिवन समेत अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात करेंगे। जानकारी के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों (iCET) पर चर्चा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के बाद यह वार्ता दोनों देशों केसंबंधों में बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है।
बता दें, मई 2022 में जापान में में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक के बाद एक संयुक्त बयान में आईसीईटी का पहली बार उल्लेख किया गया था।
डोभाल के साथ कई बड़े अधिकारी पहुंचेंगे अमेरिका
एनएसएस अजीत डोभाल एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिका पहुंचे हैं। इसमें पांच सचिव स्तर के अधिकारी और भारतीय कंपनियों के कॉरपोरेट नेतृत्व शामिल हैं। सचिव स्तर के पांच अधिकारियों में इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ, प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद, रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार जी सतीश रेड्डी, दूरसंचार विभाग के सचिव के राजाराम और डीआरडीओ महानिदेशक समीर वी कामत शामिल हैं।
आईसीईटी का मकसद अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां प्रदान करना
बता दें, आईसीईटी का मकसद दुनिया को ऐसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां प्रदान करना है, जो तुलनात्मक रूप से काफी सस्ती हों। आईसीईटी के तहत दोनों देशों ने सहयोग के छह क्षेत्रों की पहचान की है। दोनों देशों के बीच सहयोग सह-विकास और सह-उत्पादन के सिद्धांत पर आधारित होगा, जिसे धीरे-धीरे क्वाड (अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान का रणनीतिक समूह), फिर नाटो (उत्तर एटलांटिक संधि संगठन) और फिर यूरोप और बाकी दुनिया में विस्तारित किया जाएगा। भारत और अमेरिका ने आईसीईटी के तहत सहयोग के लिए जिन छह क्षेत्रों की पहचान की है, उनमें वैज्ञानिक अनुसंधान एवं विकास, क्वांटम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमता), रक्षा नवाचार, अंतरिक्ष तथा 6जी और सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत संचार पद्धतियां शामिल हैं।