सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कुशवाहा लंबे समय से जेल में बंद हैं।
बता दें कि, मायावती सरकार में केंद्र सरकार की ओर से एनआरएचएम के तहत दी गई बड़ी रकम की कुछ लोगों ने आपस में ही बंदरबांट कर ली थी। इस मामले में मायावती सरकार के कई मंत्रियों को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। उसी मामले में कुशवाहा अभी गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं। सीबीआई के अनुसार एनआरएचएम के तहत 5 हजार करोड़ का घोटाला किया गया था।
NRHM Scam: Former Uttar Pradesh Minister Babu Singh Khuswaha's petition seeking bail, dismissed by Supreme court. pic.twitter.com/3ifJzIZxia
— ANI UP (@ANINewsUP) March 3, 2017
सीबीआई अभी भी एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही है। सीबीआई ने मामले में कई मुकदमे दर्ज किए थे। इसको लेकर मायावती सरकार में उच्च पदों पर रहे कई अधिकारियों से भी पूछताछ की जा चुकी है।
सीबीआई ने 48 लोगाें को घोटाले में चिह्नित किया
बाबु सिंह कुशवाहा
गौरतलब हो कि एनआरएचएम घोटाले की जांच के दौरान सीबीआई को आशा किट में भी घोटाले का हाथ लगा था। स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2009-10 में लाखों रुपये से आशा किट खरीदी गईं थीं। सीबीआई ने स्वास्थ्य विभाग से आशा किट का लेखा-जोखा मांगा तो विभाग के अफसरों के पसीने छूट गए। विभाग लेखा-जोखा नहीं दे पा रहा है।
बनारस मंडल में एनआरएचएम घोटाले की पांच माह तक चली जांच में सीबीआई ने 48 लोगाें को घोटाले में संलिप्तता की आशंका पर चिह्नित किया था। छानबीन के बाद उसमें से 28 को आरोपी के रूप में सूचीबद्ध किया गया था, जिसमें बाबू सिंह कुशवाहा का नाम भी शामिल है।
बता दें कि घोटाले में बनारस के तीन, चंदौली के दो तथा जौनपुर के एक पूर्व सीएमओ, एनआरएचएम सेल के एक दर्जन से ज्यादा कर्मचारी हैं। इसके अलावा गाजीपुर के एक ठेकेदार और दवा सप्लायर का नाम भी आरोपियों की सूची में है। सीबीआई सूची में शामिल इन अधिकारियाें, कर्मियाें और ठेकेदाराें के आमदनी के स्त्रोत, पारिवारिक पृष्ठभूमि, अचल और चल संपत्ति, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और पिछली सरकार में नेताआें से संबंध की छानबीन कर रही है।