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पेंशन फंड: जोखिम में है 1 करोड़ एनपीएस कर्मियों का 17 लाख करोड़? पीएम मोदी को भेजी शिकायत में दावा

सार

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में जमा कर्मचारियों की रकम के निवेश को लेकर कर्मचारी संगठन ने सवाल उठाए हैं। ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलाइज फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत देकर एनपीएस ट्रस्ट और पीएफआरडीए की कार्यप्रणाली की जांच कराने की मांग की है।
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एनपीएस के पैसे से स्टार्टअप में 17 हजार करोड़ के निवेश पर सवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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'ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलाइज फेडरेशन' के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल द्वारा पीएम मोदी को दी गई एक शिकायत ने केंद्र और राज्यों के एनपीएस कर्मचारियों को हैरान कर दिया है। बुधवार को यह शिकायत पीएमओ में दी गई है। डॉ. पटेल ने अपनी शिकायत में खुलासा किया है कि केंद्र व राज्यों के एक करोड़ 'एनपीएस' कर्मियों का 17 लाख करोड़ रुपये का फंड जोखिम में है।
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एनपीएस में जमा कुल फंड, जो 17 लाख करोड़ रुपये है, उसमें से दो स्टार्टअप को 17000 करोड़ रुपये देने की बात कही जा रही है। बाकायदा चार सौ करोड़ रुपये के प्रतीकात्मक चेक संबंधित स्टार्टअप को दिए गए हैं। डॉ. पटेल ने अपनी शिकायत में मांग की है कि पेंशन फंड को गलत तरीके से निवेश करने और लगातार गड़बड़ियों के चलते एनपीएस ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाए। 

एनपीएस में जमा पैसा सुरक्षित नहीं
कर्मचारी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कहना है कि जब मौजूदा दौर में 'म्यूचुअल फंड' में पैसा डूब रहा है तो स्टार्टअप में निवेश से कैसे फायदा होगा। देश में 28 लाख केंद्रीय एवं तकरीबन 70 लाख राज्य कर्मचारियों का एनपीएस में जमा पैसा सुरक्षित नहीं है। शिकायत में एनपीएस ट्रस्ट एवं पीएफआरडीए द्वारा की गई गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों, प्रशासनिक विफलताओं एवं हितों के टकराव की उच्चस्तरीय जांच कराने, सीएजी ऑडिट तथा पब्लिक फंड के नुकसान की भरपाई करवाने और जवाबदेही तय करने की बात कही गई है। शिकायत की प्रति वित्त मंत्री, डीओपीटी मंत्री, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सीएजी, कैबिनेट सेक्रेटरी और वित्त मंत्रालय के सचिव को भेजी गई है। 
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22 साल में भी एक प्रतिशत की गारंटी नहीं
डॉ. पटेल के मुताबिक, लाखों कर्मचारियों के पेंशन फंड को गलत तरीके से निवेश करने और लगातार गड़बड़ियों के चलते एनपीएस ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग कर उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जाएं। जांच में यह बात भी शामिल हो कि ट्रस्ट द्वारा कर्मचारियों के 17000 करोड़ के पेंशन फंड को अल्टीरिया कैपिटल और ट्राइफेक्टा जैसे हाई रिस्क स्टार्टअप्स में बिना किसी गारंटी के, देने का वादा किस आधार पर किया गया है।

हाल ही में एनपीएस दिवस पर इन स्टार्टअप्स को 400 करोड़ के प्रतीकात्मक चेक दिए गए हैं। इन स्टार्टअप को कुल 17000 करोड़ रुपये, बतौर निवेश देने का वादा किया गया है। पेंशन फंड से हर वर्ष 2500 करोड़ की फीस वसूलने वाले एनपीएस ट्रस्ट, सीआरआईएसआईएल, पीएफआरडीए और कई निजी सलाहकार मिलकर भी 17 लाख करोड़ के निवेश पर 22 साल में भी एक प्रतिशत की गारंटी नहीं दे पाए। दूसरी ओर प्राइवेट कंपनियों को पब्लिक का हजारों करोड़ रुपये देने का वादा किया जा रहा है। 
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साधारण ब्याज के बराबर भी रिटर्न नहीं
पिछले पांच वर्षों से पब्लिक का लाखों करोड़ रुपये का फंड, ईपीएफओ साधारण ब्याज के बराबर भी रिटर्न नहीं दे रहा है। पिछले एक साल से तो लगातार रिटर्न ही नेगेटिव में चल रहा है। इस मामले में अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया और इनकी जवाबदेही तय नहीं की गई तो 'ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलाइज फेडरेशन' 20 दिसम्बर को पीएफआरडीए के ऑफिस का घेराव करेगा। शिकायत में लिखा है कि देशभर के एनपीएस कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई और सामाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी जिस एनपीएस ट्रस्ट एवं पीएफआरडीए पर है, उनकी कार्यप्रणाली में गंभीर अनियमितताएं, वित्तीय लापरवाही, निजी संस्थाओं को अनुचित लाभ पहुंचाने और कर्मचारियों के हितों के खिलाफ काम करने के कई मामले प्रतीत हो रहे हैं। इसके चलते भविष्य में कर्मचारियों के पेंशन फंड को गंभीर नुकसान पहुंचता दिख रहा है। यही नहीं, यह आने वाला खतरा वर्ष 2020 में आईएलएंडएफएस के 92000 करोड़ के नुकसान से भी कई गुना गंभीर हो सकता है।  
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