पिछले दिनों जब ब्रेड में ब्रोमेट होने के मामले ने तूल पकड़ा तब भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने ब्रेड में ब्रोमेट को प्रतिबंधित करने की बात कही। वहीं दूसरी ओर एफएसएसएआई की ओर से बोतल बंद पानी के लिए तैयार किए जा रहे ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में ब्रोमेट को शामिल किया गया है। जबकि अभी तक के मानक के अनुसार भारत में बोतल बंद पानी में ब्रोमेट का कोई जिक्र नहीं है।
भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने जो बोतल बंद पानी के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन तैयार किया है उसमें प्रति एक लीटर पानी में 10 माइक्रोग्राम ब्रोमेट को स्वीकार किया गया है। इसके अलावा कई अन्य तत्वों को अलग-अलग मात्रा में शामिल किया गया है लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से ब्रोमेट खतरनाक है फिर भी इसे ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में शामिल करने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि इस ड्रुफ्ट पर अभी अंतिम मुहर नहीं लगी है।
कई देशों में बोतल बंद पानी में ब्रोमेट की मात्रा को मंजूरी मिली हुई है। कीहीं प्रति लीटर 10 माइक्रोग्राम, कहीं इससे कम तो कहीं इससे ज्यादा है। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो जिन देश में पुराने समय के नियम-कानून चले आ रहे हैं वहीं पानी में ब्रोमेट की मात्रा ज्यादा है लेकिन जिन देशों में पिछले कुछ वर्षों में नियम बने हैं वहां ब्रोमेट की बहुत कम मात्रा को मंजूरी मिली है। यही नहीं कुछ वर्ष पहले तक 10 माइक्रोग्राम या इससे ज्यादा ब्रोमेट की मारत्रा होने पर ही जांच में पता लग पाता था लेकिन अब ब्रोमेट की मामूली मात्रा होने पर भी इसका पता लगाया जा सकता है।
भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पवन कुमार अग्रवाल ने बताया कि कई देशों में बोतल बंद पानी में ब्रोमेट की मात्रा को मंजूरी मिली हुई है। कीहीं प्रति लीटर 10 माइक्रोग्राम, कहीं इससे कम तो कहीं इससे ज्यादा है। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो जिन देश में पुराने समय के नियम-कानून चले आ रहे हैं वहीं पानी में ब्रोमेट की मात्रा ज्यादा है लेकिन जिन देशों में पिछले कुछ वर्षों में नियम बने हैं वहां ब्रोमेट की बहुत कम मात्रा को मंजूरी मिली है। यही नहीं कुछ वर्ष पहले तक 10 माइक्रोग्राम या इससे ज्यादा ब्रोमेट की मारत्रा होने पर ही जांच में पता लग पाता था लेकिन अब ब्रोमेट की मामूली मात्रा होने पर भी इसका पता लगाया जा सकता है।