मतदान के दिन मतदान केंद्रों पर तैनात किए जाने वाले राज्य पुलिस कर्मियों की तैनाती की प्रक्रिया संबधित निर्वाचन क्षेत्रों में तैनात केंद्रीय पुलिस पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में कराई जाएगी। चुनाव आयोग ने यह आदेश दिया है, ताकि पारदर्शिता को बढ़ाया जा सके।
चुनाव में पुलिस कर्मियों की इस तरह से तैनाती की प्रक्रिया (रैंडमाइजेशन) से निष्पक्षता सुनिश्चित होती है। इसके तहत स्थानीय पुलिस को उनके मौजूदा थाना क्षेत्रों से बाहर तैनात किया जाता है, ताकि किसी तरह का पक्षपात न हो।
चुनाव आयोग ने पत्र में क्या कहा?
- चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और पुलिस महानिदेशकों को पत्र लिखा है।
- इसमें आयोग ने कहा कि भविष्य में होने वाले सभी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदान के दिन मतदान केंद्रों पर राज्य पुलिस कर्मियों की तैनाती की प्रक्रिया संबंधित जिले के निर्वाचन क्षेत्रों में तैनात पुलिस पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में होगी।
यह नई प्रक्रिया किन राज्यों में लागू होगी?
एक अधिकारी ने बताया कि जिला पुलिस अधीक्षक ही राज्य पुलिस कर्मियों की तैनाती करते हैं और वे आगे भी यह काम करते रहेंगे। लेकिन अब यह पूरी प्रक्रिया केंद्रीय पुलिस पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में होगी। केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में अप्रैल में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। इन राज्यों में यह नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
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चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने, मतदान केंद्रों की सुरक्षा करने, संवेदनशील मतदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी के लिए राज्य पुलिस, राज्य सशस्त्र पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय बलों को भी तैनात किया जाता है। चुनाव आयोग ने कहा है कि इन नए निर्देशों की जानकारी सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों, पुलिस आयुक्तों, निर्वाचन अधिकारियों और सेक्टर अधिकारियों को दी जानी चाहिए।