फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चीनी सैनिकों और आईटीबीपी के बीच अब नहीं होगी धक्का-मुक्की, चीनी भाषा में ही होगी बात

Wed, 23 Oct 2019 08:04 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
भारत चीन बॉर्डर
विज्ञापन
चीनी फौज के पास सर्विलांस के जो उपकरण हैं, उससे कहीं ज्यादा क्षमता वाली तकनीक आईटीबीपी को मिलेगी। सीमा पर चौकसी के लिए लगने वाले ये उपकरण रात में भी काम करेंगे। कई किलोमीटर की दूरी पर कोई हरकत होगी, तो वह सर्विलांस कैमरों में कैद हो जाएगी। इसके अलावा सीमा पर दोनों देशों के जवानों के बीच जो धक्का-मुक्की होती है, उसका हल भी निकाल लिया गया है।

अफसरों-जवानों को सिखाई चीनी

देखने में आया था कि दोनों देशों के सैनिकों के दरमियान भाषा एक बड़ी बाधा बनी हुई थी। दोनों तरफ से कौन क्या कह रहा है, किसी को समझ नहीं आता था। नतीजा, जवान एक दूसरे को आगे-पीछे धकेलने का प्रयास करते थे। इसके लिए आईटीबीपी के 200 से अधिक अफसरों और जवानों को चीनी भाषा सिखा दी गई है। अब जो भी टीम गश्त के लिए जाएगी, उसके साथ चीनी भाषा जानने वाले कोई न कोई जवान साथ रहेगा। इसका फायदा यह होगा कि दोनों देशों के जवान आपस में धक्का-मुक्की नहीं करेंगे। आईटीबीपी के जवान उन्हें उनकी भाषा में ही समझा देंगे कि कौन किसकी सीमा में घुसा है।

बॉर्डर पर दोनों के बीच अच्छे संबंध

आईटीबीपी के डीजी एसएस देसवाल ने बल के 58वें स्थापना दिवस से एक दिन पहले यह बात कही है। सीजीओ कॉम्पलेक्स स्थित आईटीबीपी मुख्यालय में मीडिया कर्मियों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध हैं। दो वर्षों के दौरान भारत-चीन के बीच कोई तकरार नहीं हुई है। शांतिपूर्वक गश्त होती है। एक सवाल के जवाब में वे बोले कि यह सही है कि सर्विलांस के लिए चीन अपनी सीमा के भीतर हाईपॉवर उपकरण लगा रहा है। वहीं आईटीबीपी को भी चीन के उपकरणों से कहीं ज्यादा क्षमता वाली सर्विलांस तकनीक मुहैया कराई जा रही है।

विज्ञापन


आईटीबीपी के पास 180 बॉर्डर आउट पोस्ट हैं। जवानों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए अब सभी बीओपी को कंपोजिट बीओपी में बदला जा रहा है। लद्दाख में जब माइनस 40-50 डिग्री तापमान होता है, तो इन कंपोजिट बीओपी पर वह तापमान 25 से 30 डिग्री के बीच रहेगा। साउथ लद्दाख के लुकुंग इलाके में पहली कंपोजिट बीओपी बना दी गई है।

गश्त के दौरान होती रही है तकरार

एलएसी यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल को लेकर दोनों देशों के बीच तकरार होती रही हैं। देसवाल के मुताबिक यह तकरार उस वक्त होती है, जब चीनी सैनिक और आईटीबीपी के जवान एक ही रुट पर होते हैं। जिस रेखा पर आईटीबीपी वाले चलते हैं, वहीं सामने से चीनी सैनिक भी गश्त करते हुए आ जाते हैं। चीनी सैनिक कहते हैं कि यह जमीन हमारी है, आप यहां से चले जाओ। इसी चक्कर में उनके बीच धक्का-मुक्की हो जाती है।

1053 किमी लंबी सड़कों का प्रस्ताव मंजूर

खैर, अब लंबे समय से ऐसी कोई नौबत नहीं आई है। वजह, आईटीबीपी के दो सौ से अधिक जवानों को चीनी भाषा सिखा दी गई है। जब भी कुछ ऐसा होता है तो वे आपस में बातचीत कर मामला सुलझा लेते हैं। चीनी सैनिकों को उनकी भाषा में समझा दिया जाता है। बॉर्डर इलाकों में सड़क निर्माण को लेकर हुई देरी बाबत डीजी बोले कि यह निर्माण कंपनी की वजह से हुई है। लद्दाख क्षेत्र में अधिक पर्यटक आएं, इसके लिए इनर लाइन एरिया परमिट की शर्तों में कुछ ढील दी जा रही है। पिछले पांच साल में आईटीबीपी ने सड़कों के निर्माण को खासी प्रमुखता दी है। पहले चरण में 277.5 किलोमीटर की लंबाई वाले 11 रोड बनाए गए थे। दूसरे चरण में 1053.52 किलोमीटर लंबी सड़कों का प्रस्ताव मंजूर हुआ है।

 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें