वाम दलों के रुख में आए सकारात्मक बदलाव ने सालों से अटके पड़े वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) बिल की राह आसान कर दी है। बदली सियासी परिस्थितियों से उत्साहित सरकार ने वाम दलों, अन्नाद्रमुक सहित अन्य विपक्षी दलों की मांगों को पूरा करने के लिए माथापच्ची शुरू कर दी है। सरकार ने संकेत दिया है कांग्रेस के इतर अन्य विपक्षी दलों का सहयोग हासिल करने के लिए वह एक फीसदी प्रवेश कर खत्म करने, विवाद निपटाने वाली समिति को और शक्ति देने और कर दरों में कमी करने संबंधी जैसी मांगों को पूरा करेगी।
गौरतलब है कि आगामी 27 जून को कैबिनेट की संसदीय मामलों की समिति संसद के मानसून सत्र का कार्यक्रम तय करेगी। इसी बैठक में जीएसटी बिल पारित कराने का तानाबाना भी बुना जाएगा।
दरअसल हालिया द्विवार्षिक राज्यसभा चुनाव और उच्च सदन में कुछ मनोनीत सदस्यों के आगमन ने भाजपानीत राजग की स्थिति बेहतर की है। उच्च सदन में राजग के सदस्यों की संख्या 81 है, जबकि जीएसटी के समर्थन करने की घोषणा कर चुके सपा, जदयू, बसपा, टीएमसी जैसे 15 दलों के सदस्यों की संख्या 76 है। ऐसे में इस बिल को पारित कराने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत (164) के लिए सरकार को अब 7 सदस्यों की ही जरूरत है।
सरकार के एक रणनीतिकार के मुताबिक वाम दल (9) और अन्नाद्रमुक (14) का समर्थन हासिल करने में कोई बड़ा अड़चन नहीं है। इनकी मांगों को पूरा करने के लिए सरकार पहले से ही मंथन कर रही है। वैसे भी केरल के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री खुल कर जीएसटी के समर्थन में बोल चुके हैं।
कांग्रेस को नहीं मनाएगी सरकार
सरकार के एक रणनीतिकार के अनुसार कांग्रेस की जीएसटी दरों को संविधान का हिस्सा बनाने संबंधी मांग पर विचार नहीं किया जाएगा। इसके इतर वाम, अन्नाद्रमुक सहित कुछ विपक्षी दलों की छोटी-छोटी मांगों को अहमियत दे कर कांग्रेस को उच्च सदन में अलग-थलग किया जाएगा।
उक्त रणनीतिकार के अनुसार कांग्रेस के इतर विपक्ष की मांग एक फीसदी प्रवेश कर को खत्म करने, करों की दरें कम रखने और राज्य-केंद्र के बीच विवाद को निपटाने के लिए बनी समिति को और शक्ति देने की है। सरकार पहले ही इन मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाने का संकेत दे चुकी है। मानसून सत्र का कार्यक्रम तय होने के बाद सरकार इन सभी दलों से संपर्क साधेगी।
Published By Rahul Sankrityayan