केंद्रीय विद्यालय (केवी) की छात्राओं को भी अब स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन मिलेंगे। केंद्र सरकार ने केवी बोर्ड के इसी जुलाई से शुरू होने वाले नए सत्र से छात्राओं को ये नैपकिन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका सबसे ज्यादा लाभ दूर-दराज इलाकों के पिछड़े देहात क्षेत्र में बने केवी की छात्राओं को मिलेगा, जिन्हें आज भी सेनेटरी नैपकिन खरीदने का मौका नहीं मिल पाता है।
खास बात ये है कि देशभर के सभी 1125 केवी स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन मशीन तो लगेंगी, लेकिन यह इन्सिनरेट नहीं, बल्कि बायोडिग्रेडेबल सेनेटरी नैपकिन मशीन होंगी। इससे छात्राओं को साफ व स्वच्छ ही नहीं प्राकृतिक तरीके से डिस्पोज हो जाने वाले नैपकिन मिलेंगे।
केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बोर्ड बैठक में छात्राओं की सेनेटरी नैपकिन मुहैया करवाने की मांग उठी थी, जिसे तत्काल प्रभाव से मंजूरी दे दी गई है। फिलहाल पिछले साल पायलट प्रोजेक्ट के तहत पचास केंद्रीय विद्यालय स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन की मशीन लगाई गई थीं, लेकिन इन मशीनों के साथ इन नैपकिन को उपयोग के बाद जलाकर ठिकाने लगाने के लिए स्कूलों में इन्सिनरेटर भी लगाए गए थे।
महिला व बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने इन्सिनरेटर के उपयोग को पर्यावरण के अनुकूल नहीं बताकर इसका विरोध किया था। इसी के चलते अब ऐसे नैपकिन दिए जाएंगे, जो उपयोग के बाद खुद ही प्राकृतिक तरीके से नष्ट हो जाएंगे।
बता दें कि इससे पहले केंद्र ने बेटियों का ड्रॉपआउट रोकने व शिक्षा से जोड़े रखने के लिए छठीं से 12वीं कक्षा तक के सभी सरकारी स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन मशीन लगाने की योजना को मंजूरी दी थी।