पंजाब के फिरोजपुर में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर गलती से पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश करने वाले बीएसएफ जवान पीके साहू को को वहां के रेंजर्स ने अपनी हिरासत में ले रखा है। जवान की रिहाई के लिए कई बार फ्लैग मीटिंग कॉल की गई है, मगर पाकिस्तानी रेंजर्स की तरफ से कोई ठोस रिस्पांस नहीं मिला। पाकिस्तान, जानबूझकर कर फ्लैग मीटिंग को तव्वजो नहीं दे रहा। सूत्रों के मुताबिक, अब बीएसएफ के जवान की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित कराने के लिए डिप्लोमेटिक चैनल की मदद ली जा रही है। बीएसएफ के पूर्व अफसरों का कहना है कि गलती से एक दूसरे देश की सीमा में चले जाना कोई बड़ा अपराध नहीं है। पहले भी दोनों पक्षों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है। कई बार तो कुछ घंटे बाद ही और वो भी एक ही फ्लैग मीटिंग में मामला निपटा लिया जाता रहा है। इस बार पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति जो सख्त रवैया अपनाया है, उसके चलते बीएसएफ जवान की वापसी में देरी हो रही है। हालांकि इसमें कोई ज्यादा टेंशन की बात नहीं है। पाकिस्तान को देर सवेर बीएसएफ जवान की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करनी होगी।
बता दें कि यह घटना गत बुधवार को तब हुई, जब बीएसएफ जवान पीके साहू 182वीं बटालियन, बॉर्डर के गेट संख्या 208/1 पर तैनात थे। वे फसल कटाई के दौरान भारतीय किसानों पर नजर रख रहे थे। बीएसएफ, किसानों की सुरक्षा भी करती है। लिहाजा तेज गर्मी के मौसम में जवान ने जब पेड़ की छांव में खड़े होने का प्रयास किया तो पाकिस्तानी रेंजर्स ने उसे हिरासत में ले लिया। उनकी सर्विस राइफल भी जब्त कर ली गई। बताया जाता है कि वह कुछ समय पहले ही इस क्षेत्र में तैनात हुआ था। पांच दिन में तीन बार फ्लैग मीटिंग करने का प्रयास किया गया, मगर पाकिस्तान की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। बीएसएफ के पूर्व आईजी बीएन शर्मा बताते हैं, ऐसे मामले कमांडेंट स्तर पर निपट जाते हैं। कई बार तो कुछ घंटों में ही जवान वापस आ जाते हैं। बशर्ते, कोई अपराध की मंशा न हो। हिरासत में जवान से पूछताछ की जाती है।
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अगर सीओ के लेवल पर बात नहीं बनती है तो उसके बाद डीआईजी स्तर पर बातचीत होती है। इसके बाद आईजी स्तर पर बात की जाती है। जब सभी तरह के रास्ते बंद हो जाते हैं तो कूटनीतिक प्रयास किए जाते हैं। शर्मा के मुताबिक, पाकिस्तान को बीएसएफ जवान लौटाना ही होगा। वह उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। वजह, उसने जवान को लेकर खुद यह बात स्वीकार की है कि जवान उनकी हिरासत में है। इतना ही नहीं, इसके बाद पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि जवान को पूरी तरह से सुरक्षित रखना। अब वह कोई ऐसी चाल भी नहीं चल सकता है, जिसमें यह कह दिया जाता है कि जवान ने भागने का प्रयास किया, इसलिए उसे नुकसान हुआ है। उसे जवान पर हर पल नजर रखनी होगी। अगर जवान खुद को कोई नुकसान पहुंचाता है तो उसकी जिम्मेदारी भी पाकिस्तान की होगी।
जवान की रिहाई के लिए बीएसएफ डीजी दलजीत चौधरी, केंद्रीय गृह मंत्रालय के लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह सचिव से बातचीत की है। बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद कहते हैं, रेंजर्स की इतनी हिम्मत नहीं है कि वे लंबे समय तक बीएसएफ जवान को अपने पास रख सकें। पाकिस्तान की तरफ से जवान के फोटो जारी किए गए हैं। इसका सीधा मतलब है कि पड़ोसी मुल्क ने यह बात स्वीकार कर ली है कि बीएसएफ का जवान उनके पास है।
इस तरह की घटना कोई असामान्य नहीं है। ऐसा कई बार पहले भी होता रहा है। दोनों पक्षों द्वारा फ्लैग मीटिंग के जरिए बातचीत कर मामला सुलझा लिया जाता है। ज्यादा दिक्कत तब आती है जब पाकिस्तान इस बाबत कोई बयान ही जारी नहीं करता। यानी, वह चुप रहता। फोटो में हथियार के अलावा जवान के पास मौजूद दूसरा सामान भी दिख रहा है। ऐसे में पाकिस्तान मुकर नहीं सकता।