डिफेंस सेक्टर में जर्मनी खासी रूचि ले रहा है। जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार भारत को छोटे हथियार बेचने पर प्रतिबंध हटाने के लिए सहमत हो गई है। जर्मन सरकार के इस फैसले को भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग में बड़ा कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि जर्मनी की नजर भारत से होने वाली पनडुब्बी डील पर है। इससे पहले खबरें आई थीं कि जर्मन सरकार छह नई पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए भारतीय नौसेना के साथ बातचीत कर रही है, जिसमें जर्मनी के कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम भारतीय मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड के साथ साझेदारी के लिए बातचीत कर रही है।
जर्मनी सरकार भारत को छोटे हथियार बेचने पर प्रतिबंध हटाने के लिए तैयार हो गई है। यह प्रतिबंध हटने के बाद भारतीय सेना और राज्य पुलिस बल नाटो देशों की तरह जर्मन हथियार खरीद सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की योजना उच्च तकनीक वाली पनडुब्बियां बनाने की है और इसके निर्माण के लिए वह साझेदार की तलाश कर रहा है। वहीं इस सौदे के लिए एक जर्मन कंपनी प्रबल दावेदार बनकर उभरी है।
भारत अभी सबसे ज्यादा हथियार अमेरिका, इस्राइल, रूस और फ्रांस से खरीद रहा है। वहीं जर्मनी अपने हथियारों के निर्यात के लिए नए बाजार तलाश रहा है, अभी तक उसका फोकस यूरोपीय यूनियन के देश रहे हैं। लेकिन अब उसे यह संभावना भारत में नजर आ रही है। अभी तक भारत को हथियार बेचने वाले देशों में जर्मनी पांचवे स्थान पर है। वहीं जर्मनी जानता है कि भारत पिछले कुछ सालों से रूस पर से अपनी हथियारों की निर्भरता घटा रहा है।
2005 से 2021 तक जर्मनी की चांसलर रहीं एंजेला मर्केल की अध्यक्षता वाली जर्मनी की क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन सरकार ने कथित मानवाधिकार उल्लघंन के मामलों के चलते भारतीय पुलिस बलों को छोटे हथियारों की बिक्री को लेकर प्रतिबंध लगा दिया था। वहीं जर्मन सरकार के इस फैसले के बाद भारतीय सुरक्षा बल एमपी5 सबमशीन गन जैसे छोटे हथियार खरीद सकेंगे। एमपी5 गनों को जर्मन कंपनी हेकलर एंड कोच बनाती है, जिनका इस्तेमाल एनएसजी और मार्कोस कमांडो भी करते हैं। 2022 में, यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद, जर्मनी ने अपनी विदेश और रक्षा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए रक्षा खर्च में भारी बढ़ोतरी करने का एलान किया था।
इससे पहले भारत में जर्मनी के राजूदत फिलिप एकरमैन ने खुलासा किया था कि जर्मन सरकार छह नई पनडुब्बियों के निर्माण के लिए भारतीय नौसेना के 43,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट-75 का कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए बातचीत कर रही है। इस साल जनवरी में जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने भारत का दौरा किया था, उस दौरान उन्होंने मुंबई में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) का भी दौरा किया था, जहां जर्मन शिपबिल्डर थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स और एमडीएल ने भारत में छह स्टील्थ पनडुब्बियों के निर्माण पर सहयोग के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत जर्मन कंपनी पनडुब्बियों की इंजीनियरिंग और डिजाइन में योगदान देने के साथ-साथ कंसल्टेंसी भी देगी। वहीं, एमडीएल पनडुब्बियों के निर्माण और डिलीवरी की जिम्मेदारी लेगा।
भारत ने इससे पहले 80 के दशक के आखिर में जर्मनी के हाउल्ड्सवेर्के-डॉयचे वेर्फ़्ट (एचडीडब्ल्यू) से चार पनडुब्बियां खरीदी थीं। इनमें से दो पनडुब्बियां को 1992 और 1994 में एमडीएल में बनाया गया था, जबकि अन्य दो जर्मनी से आईं थीं।
इस साल अगस्त में तमिलनाडु में 'तरंग शक्ति' के नाम से बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास होने वाला है, जिसमें जर्मनी भी हिस्सा लेगा। इस अभ्यास में जर्मनी के 12 टॉरनेडो जेट, आठ यूरोफाइटर्स, मिड-एयर फ्यूलिंग के लिए एयरबस 300, एयरबस 400एम समेत 32 जर्मन वायु सेना के विमान हिस्सा लेंगे।