दुनियाभर में भारतीय दवाओं की गुणवत्ता पर उठते सवालों के बीच सरकार ने नीति में कई बड़े बदलाव करने का फैसला लिया है। अभी तक इन निर्णयों के बारे में जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, उससे पहले ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने सभी राज्यों को आदेश दिया है कि विदेश भेजने से पहले कफ सिरप के बैच की जांच सरकारी लैब में होना अनिवार्य है। यहां से रिपोर्ट मिलने के बाद ही उक्त कंपनी अपने बैच का निर्यात कर सकती है।
दरअसल, 2022 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक भारतीय दवा निर्माता के कफ सिरप में दो ज्ञात विषाक्त पदार्थ डायथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल मिलने की पुष्टि की थी।
इस सिरप की वजह से गाम्बिया में 70 बच्चों की मौत होने की सूचना दी गई। हालांकि, केंद्र सरकार ने जांच के बाद सिरप और बच्चों की मौत के बीच संबंध मिलने से इन्कार किया। डब्लूएचओ का कहना है कि वह अभी भी आपूर्ति शृंखला के भीतर अपराधी की तलाश कर रहा है।
बीते 15 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय से जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि दवा उद्योग के बारे में महत्वपूर्ण बातों को अनदेखा किया गया। इसमें यह भी कहा है कि इसे लेकर नीति में बदलाव पर विचार किया है। चर्चा है कि नीतियों में बदलाव के जरिए सरकार भारत के 41 अरब डॉलर वाले फार्मास्युटिकल उद्योग की निगरानी को बढ़ा सकता है।
उज्बेकिस्तान में 19 बच्चों की गई थी जान
डब्ल्यूएचओ ने उज्बेकिस्तान में 19 बच्चों की मौत के पीछे भारत की अन्य कंपनी के कफ सिरप को बताया। इस कंपनी से जुड़े तीन कर्मचारियों को गिरफ्तारी भी किया है।
इसके अलावा डब्ल्यूएचओ ने हाल ही में एक तीसरे भारतीय दवा निर्माता को मार्शल आइलैंड्स और माइक्रोनेशिया में दूषित सिरप बेचने के लिए दोषी पाया। दो माह पहले हैदराबाद में स्वास्थ्य मंत्रालय के और दवा उद्योग से जुड़े तमाम प्रतिनिधियों की बैठक में भारतीय दवाओं पर लगातार उठ रहे सवालों को लेकर चर्चा करते हुए समाधान पर जोर दिया गया।