कांग्रेस खेत-खलिहान और किसान को लेकर अपनी राजनीतिक जमीन तलाशेगी। किसानों के कर्जा माफी को चुनावी मुद्दा बनाने वाली कांग्रेस ने पंजाब से इसकी शुरूआत भी कर दी है। पंजाब में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कर्जा माफी की घोषणा को पूरा करने के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने आंकलन शुरू करा दिया। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने यूपी और पंजाब के किसानों से उनकी समस्याओं को लेकर दो लाख से अधिक फार्म भरवाए थे। पार्टी अपने राज्यों में किसानों की समस्याएं तत्काल हल करने की दिशा में गंभीर दिख रही है।
कांग्रेस की पंजाब सरकार ने किसानों की कर्ज माफी के आकलन के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी भी गठित कर दी है। कांग्रेस का फोकस फिलहाल पंजाब और हिमाचल के किसानों पर है। ताकि यहां के किसानों से मैसेज अन्य राज्यों में जाए। हिमाचल में विधानसभा चुनाव होने है लिहाजा कांग्र्रेस नेतृत्व ने हिमाचल के किसानों से जुड़ी लंबित मांगों पर जल्द फैसला लेने को भी कहा है। हिमाचल के पड़ोसी पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में सरकार खोने के बाद कांग्रेस हिमाचल को लेकर सतर्क हो गई है।
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला का कहना है कि कांग्रेस किसानों के प्रति चिंतित हैं और अपने राज्यों में किसानों की समस्याओं का समाधन कर रही है । भाजपा सरकारों को न तो पहले किसानों की चिंता थी और न ही अब दिखाई दे रही है। किसानों के कर्ज माफी पर स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी सभाओं में कहा कि पहली कैबिनेट की बैठक में फैसला लेंगे। अब एक कमेटी बनाकर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
उनका कहना है कि 2014 में किसानों को फसल की लागत का फीसदी मुनाफा देने का वादा भी पूरा नहीं हुआ है। केंद्र सरकार ने यूपी में बीते तीन सालों में कुल उत्पादन का चार फीसदी गेंहू और पौने दो फीसदी धान ही खरीदा है। अधिकतर फसलों में समर्थन मूल्य में तीन से चार फीसदी ही बढ़ोत्तरी हुई है। गन्ना किसानों की हालत और खराब है। जमीन अधिग्रहण कानून का अगर कांग्रेस विरोध नहीं करती थी किसानों की मुश्किलें और बढ़ती। बावजूद भाजपा शासित राज्यों ने अपने यहां इसी कानून को अलग ढंग से पेश कर इसे लागू कर लिया है। गुजरात और राजस्थान में किसानों की जमीन अधिग्रहित हो रही हैं और हरियाणा भी इसकी तैयारी कर रहा है।