लोकसभा में शुक्रवार को संसोधित मोटर वाहन अधिनियम पेश किया गया। इसमें एक प्रावधान आया है कि अब नशे के चलते अगर एक्सीडेंट होता है तो पीड़ितों को इंश्योरेंस कंपनी मुआवजा नहीं देगी, बल्कि दोषी नुकसान की भरपाई करेगा। इतना ही नहीं ये मुआवजा आरोपी के आय पर निर्भर रहेगा।
एक एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार ऐसे प्रावधान क्यों ला रही है, जिससे आम आदमी का नुकसान हो। एक्सपर्ट ने चिंता जताई कि पीड़ितों के कम मुआवजा मिलेगा क्योंकि मुआवजा ड्राइवर की आय पर टिका होगा। और इससे सिर्फ इंशोयरेंस कंपनियों को फायदा पहुंचेगा।
इस प्रावधान का विरोध करने वालों ने कहा कि अगर कोई नशे की हालत में हादसे को अंजाम देता है तो ये प्रशासन की नाकामी होती है। लेकिन इसका खामियाजा पीड़ित को भुगतना पड़ता है। इस नए संसोधित अधिनियम में ड्राइवर की ओर से गैर इरादतन हत्या की धाराओं को शामिल नहीं किया गया है। बता दें कि इसे गैर जमानती क्राइम माना जाता है और 10 साल की जेल का प्रावधान है।