सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि
सीबीआई के विशेष जज बीएस लोया की मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह सभी लोगों को जानना चाहिए। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कहा, यह ऐसा मामला है जिसमें कुछ भी गुप्त नहीं रहना चाहिए। हालांकि शीर्ष अदालत ने यह फैसला महाराष्ट्र सरकार पर छोड़ दिया कि वह जस्टिस लोया की मौत से जुड़ा कौन सा दस्तावेज याचिकाकर्ता को देना चाहती है।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड आदेश के अनुसार, दस्तावेज सात दिन के अंदर पेश करने होंगे। अगर इन्हें उचित माना जाता है तो इसकी प्रतियां याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही इन्हें उचित बेंच के समक्ष पेश किया जाएगा। राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले का ट्रायल करने वाले जज लोया की वर्ष 2014 में मौत हो गई थी।
शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर कर इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार ने सीलबंद लिफाफे में जस्टिस लोया की मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी। साथ ही याचिकाकर्ता की उस मांग पर भी एतराज जताया कि पूरी सामग्री उन्हें देखने के लिए मिलनी चाहिए।