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इन कदमों से बेहतर हो सकती थी नोटबंदी योजना

Mon, 14 Nov 2016 01:35 PM IST
जुबैर अहमद/ बीबीसी
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- फोटो : reuters
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देश में ''मुद्रा अराजकता'' से आम लोग परेशान हैं। उनकी राय में मोदी सरकार का नोटबंदी का कदम सही है लेकिन इसे लागू करने के पीछे अच्छे से विचार नहीं किया गया। लंबी कतारों में नए नोट निकालने और पुराने नोट जमा करने वाले आम लोगों में से कई की सोच है कि प्रधानमंत्री के इस एक्शन से काले धन को सिस्टम से निकालने में मदद होगी। कुछ कहते हैं इससे अवैध समपत्ति पर, जो काले धन का एक बड़ा हिस्सा है, कोई फर्क नहीं पड़ेगा
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प्रधानमंत्री ने कहा लोगों की तकलीफें दूर होने में 50 दिन लगेंगे। वित्त मंत्री के अनुसार एटीएम को सही करने में तीन हफ्ते लग जाएंगे। सरकार की तैयारी नहीं थी। ऐसा खुद भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है। वो सरकार की तैयारी की कमी से चकित हैं। पेश है ऐसे पांच कदम जिसके लिए विशेषज्ञ और आम जनता के अनुसार सरकार को नोटबंदी से पहले तैयार रहना चाहिए थे ।

एटीएम का रिकैलिब्रेशन
देश में दो लाख से अधिक एटीएम हैं जिनमे से कई 8 नवंबर से बंद पड़े हैं। जो खुले हैं उनमे 100 रुपये के नोट तुरंत निकल जाते हैं। सरकार ने पहले 2000 रुपये के नए नोट और अब 500 रुपये के नए नोट जारी किये हैं। लेकिन फिलहाल ये नोट बैंक से मिल सकेंगे, एटीएम से नहीं। इसके लिए सभी एटीएम का रीकैलिब्रेशन होना जरूरी है। यानी नए नोटों के लिए या तो नए कैसेट लगाने पड़ेंगे या पुराने कैसेट का रीकैलिब्रेशन होना चाहिए। वित्त मंत्री कहते हैं इस प्रक्रिया में तीन हफ्ते लगेंगे लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं इसमें इससे कहीं अधिक समय लग सकता है।
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- फोटो : reuters
100 रुपये की अधिक उपलब्धता
केंद्रीय सरकार की पाबंदी से पहले 500 और 1000 रुपये के नोट देश में कुल नोटों का 85 प्रतिशत थे। यानी 100, 50, 20 और 10 रुपए के नोटों की उपलब्धि केवल 15 प्रतिशत थी। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के अनुसार 100 रुपये के नोटों की कमी पहले से थी लेकिन नोटबंदी के बाद इसकी मांग कई गुना बढ़ी है जिसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक को तैयार रहना चाहिए था। संघ के मुताबिक आरबीआई इस में बुरी तरह से नाकाम रहा एटीएम में 100 रुपये वाले कैसेट 500 और 1000 रुपये के नोटों के मुकाबले छोटे होते हैं। बड़े कैसेट का इंतजाम 8 नवंबर से पहले होना चाहिए था।

मोबाइल एटीएम और बैंक की बढ़ोतरी
विशेषज्ञ कहते हैं कि नोटबंदी से पहले ग्रामीण इलाकों और घनी आबादी वाली बस्तियों में कुछ समय के लिए मोबाइल एटीएम और बैंक की स्थापना करनी चाहिए थी। सुब्रमण्यम स्वामी ने इस पर ध्यान न देने पर अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है।

नोट बदलने, जमा करने की अलग व्यवस्था
आम लोगों की राय ये है कि नोटों के जमा करने की कतार और नोटों के निकालने की लाइन अलग होनी चाहिए थी। कुछ बैंकों ने ऐसा किया है लेकिन अधिकतर बैंकों में दोनों तरह की प्रक्रिया की कतार एक ही है जिससे बैंकों में अराजकता जैसा माहौल बन गया है। बुजुर्गों और महिलाओं की कतारें भी अलग होनी चाहिए जो सभी बैंक में नहीं हो सका है।

बैंकों के समय को बढ़ाना चाहिए
सरकार के कहने पर बैंक शनिवार और रविवार को खुले रहे लेकिन इनके समय को बढ़ाना चाहिए था। कई लोग जब ऑफिस से वापस लौटते हैं तो बैंक बंद हो जाते है। वो केवल एटीएम से पैसे निकालने की कतार में ही खड़े हो सकते हैं लेकिन अगर उन्हें नॉट बदलना है तो उन्हें बैंकिंग कारोबार के समय के अंदर ही बैंक जा सकते हैं
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